नई दिल्ली: केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों की जंग में चुनी हुई सरकार की जीत हुई है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे दिल्ली की जनता और लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया. वहीं दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला चुनी हुई सरकार के पक्ष में आया है. दिल्ली में एलजी की मनमानी नहीं चलेगी. अब फाइलें एलजी के पास भेजने की जरूरत नहीं है. पुलिस, पब्लिक ऑर्डर और जमीन ये तीन ही रिजर्व्ड सब्जेक्ट हैं जो एलजी के पास रहेंगे. सिसोदिया ने कहा कि केंद्र और एलजी ने संविधान की मनमाने गंढ से व्याख्या की थी संविधान में दिल्ली सरकार को जितनी शक्ति दी गई है, सुप्रीम कोर्ट ने उसे दोबारा स्थापित किया है. Also Read - क्या Moratorium Period के दौरान बैंक नहीं वसूलेंगे ब्याज? मोदी सरकार लेने जा रही ये फैसला

संजय सिंह बोले
दूसरी ओर आप के राज्यसभा सासंद संजय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लोकतंत्र और संविधान में लोगों की आस्था बढ़ेगी. अब ये फिर साबित हुआ कि देश जनता के वोट से चलेगा. उन्होंने कहा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद राशन की होम डिलेवरी से लेकर मुहल्ला क्लिनिक तक में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. Also Read - Special Train for UPSC Prelims Exam 2020: UPSC प्रीलिम्स परीक्षा के लिए रेलवे इन राज्यों में चलाएगी स्पेशल ट्रेनें, इस दिन से होगा संचालन 

क्या कहा शीला दीक्षित ने
वहीं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है वह बहुत क्लियर है. संविधान के आर्टिकल 239 (AA) के अनुसार दिल्ली राज्य नहीं है. यह केंद्र शासित प्रदेश है. अगर दिल्ली की चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल एक साथ काम नहीं करेंगे तो दिल्ली की जनता को ही परेशानी होगी. कांग्रेस ने दिल्ली में 15 साल तक शासन किया लेकिन एलजी और राज्यपाल के बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं हुआ. Also Read - अच्छी खबर! कोरोना और डेंगू से जूझ रहे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की हालत अब बेहतर

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा
गौरतलब है कि दिल्ली के उपराज्यपाल को स्वतंत्र फैसला लेने का अधिकार नहीं है वह अवरोधक के तौर पर कार्य नहीं कर सकते. उप राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सहायता से और सलाह पर काम करना होगा. मंत्रिपरिषद के सभी फैसलों से उपराज्यपाल को निश्चित रूप से अवगत कराया जाना चाहिए लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इसमें उपराज्यपाल की सहमति आवश्यक है. उप राज्यपाल को यांत्रिकी (मशीनी) तरीके से कार्य नहीं करना चाहिए और ना ही उन्हें मंत्रिपरिषद के फैसलों को रोकना चाहिए.उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उपराज्यपाल को स्वतंत्र अधिकार नहीं सौंपे गए हैं. उप राज्यपाल सामान्य तौर पर नहीं, केवल अपवाद मामलों में मतभेद वाले मुद्दों को राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं.

मंत्रिपरिषद लेगी फैसला
उप राज्यपाल को मंत्रिपरिषद के साथ सामंजस्यपूर्ण तरीके से काम करना चाहिए और मतभेदों को विचार-विमर्श के साथ सुलझाने के लिए प्रयास करने चाहिए. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ ने अपने अलग लेकिन सम्मलित फैसले में कहा कि उपराज्यपाल को निश्चित रूप से यह महसूस होना चाहिए कि मंत्रिपरिषद जनता के प्रति जवाबदेह है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून और व्यवस्था सहित तीन मुद्दों को छोड़ कर दिल्ली सरकार के पास अन्य विषयों में शासन का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से दिए गए फैसले में कहा कि असली ताकत मंत्रिपरिषद के पास है. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि उपराज्यपाल को निश्चित रूप से यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि निर्णय वह नहीं बल्कि मंत्रिपरिषद लेगी.