Sheila Dikshit Death: दिल्ली की आधुनिक शिल्पकार कही जाने वाली कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह 81 साल की थीं. फोर्टिस-एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में अपराह्न तीन बजकर 55 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली. दिल्ली सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सम्मान में दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की. शनिवार की शाम उनका निधन हो गया. राजकीय शोक की घोषणा उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने की. शीला दीक्षित का अंतिम संस्‍कार रविवार की दोपहर 2:30 बजे दिल्‍ली के निगमबोध घाट पर किया जाएगा. आम लोग अंतिम दर्शन कर सकें, इसके लिए उनके पार्थिव शरीर को दोपहर 12 से 1 बजे तक कांग्रेस मुख्‍यालय में रखा जाएगा. Also Read - सोनिया गांधी ने PC चाको व सुभाष चोपड़ा का इस्तीफा स्वीकारा, गोहिल बने अंतरिम प्रभारी

शीला दीक्षित के निधन के बाद जहां एक तरफ शोक का माहौल है, वहीं कांग्रेस पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे हैं. दरअसल, दिल्ली कांग्रेस में शीला दीक्षित के कद का कोई नेता नहीं है. संभवतः इसी वजह से बुजुर्ग राजनेता को कांग्रेस पार्टी ने अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी का जिम्मा सौंपा था. शीला दीक्षित बखूबी इस भूमिका को निभा भी रही थीं. लेकिन अचानक हुए उनके निधन के बाद दिल्ली कांग्रेस के समक्ष एक ऐसे नेता की तलाश करने की चुनौती उत्पन्न हो गई है. Also Read - Delhi Results 2020: करारी हार के बाद सुभाष चोपड़ा ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

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दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने में चूंकि कुछ ही महीने शेष हैं, ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन से दिल्ली कांग्रेस के समक्ष एक ऐसे नेता की तलाश करने की चुनौती पैदा हो गई है जो उनकी जिम्मेदारी संभाल सके. दीक्षित के निधन के बाद अब दिल्ली कांग्रेस इकाई के सामने दो चुनौतियां हैं…नया नेता तलाशना और पार्टी में एकजुटता कायम करना. नए नेता को दिल्ली इकाई को एकजुट करने की चुनौती से भी जूझना पड़ सकता है.

एक नेता ने कहा, ‘‘नेताओं की मौजूदा जमात में कोई भी दीक्षित की लोकप्रियता से मेल नहीं खाता है. तीन कार्यकारी अध्यक्षों हारुन युसूफ, देवेन्द्र यादव और राकेश लिलोठिया क्रमश: वरिष्ठ नेताओं जेपी अग्रवाल, एके वालिया और सुभाष चोपड़ा से कनिष्ठ है.’’ नेता ने कहा, ‘‘दीक्षित के अचानक निधन से दिल्ली कांग्रेस बुरी तरह से प्रभावित हुई है जो इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थी.’’ वर्ष 2013 के बाद से हर प्रमुख चुनाव में तीसरे स्थान पर रह रही कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहकर आम आदमी पार्टी कुछ हद तक किनारे करने में सफल रही थी और उसे कुछ उम्मीद दिखाई दी थी. कांग्रेस पांच सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी.

श्रद्धांजलिः राजनीति के 4 दशकों के सफर में कांग्रेस का स्तंभ बन गई थीं शीला दीक्षित

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दीक्षित अगले वर्ष जनवरी-फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थीं. अब पार्टी को चुनाव से पहले संगठन का नेतृत्व करने के लिए एक नए नेता की तलाश करनी होगी. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के पूर्व प्रमुख अजय माकन ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी दिल्ली में कुछ हद तक अपना प्रभाव छोड़ने में सफल हुई थी. लेकिन केंद्रीय स्तर पर पार्टी के भीतर मची उथल-पुथल और दिल्ली कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को देखते हुए, शीला दीक्षित के स्थान को भरना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है.

(इनपुट – एजेंसियां)