नई दिल्लीः अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले एनडीए के सहयोगियों में खटपट शुरू हो गया है. महाराष्ट्र में सरकार के साथा साझेदार शिवसेना और आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के बाद अब शिरोमणि अकाली दल ने भी भाजपा के गठबंधन चलाने के तरीकों को लेकर नाराजगी जताई है. उधर, जम्मू-कश्मीर में भाजपा के साथ सरकार का नेतृत्व कर रही पीडीपी ने भी मोदी सरकार की कश्मीर नीति पर नाखुशी जताते हुए पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की राह पर चलने की मांग की है.

इकोनॉमिक टाइम्स अखबार से बातचीत में अकाली दल ने वरिष्ठ नेता और सांसद नरेश गुजराल ने कहा है कि भाजपा को एनडीए के सहयोगियों की कीमत पर अपना हित नहीं साधना चाहिए. उसे पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के गठबंधन धर्म से सीखना चाहिए और उसी के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए. उन्होंने भाजपा और टीडीपी के बीच चल रहे खटपट में भी आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी का समर्थन किया और कहा कि मोदी सरकार को चंद्रबाबू नायडू से किए वादों को पूरा करना चाहिए न कि उनकी पार्टी के लिए कठिन स्थिति पैदा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अकाली दल भाजपा का सबसे पुराना साथी है और उनकी पार्टी ने राष्ट्रहित में भाजपा की सरकार को मजबूती देने का काम किया है. अकाली दल ने कांग्रेस की भ्रष्ट राजनीतिक के विकल्प के रूप में विश्वसनीय भाजपा को चुना. लेकिन आज भाजपा के सहयोगी दलों को महत्व नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि वाजपेयी के जमाने में एनडीए के सहयोगियों के साथ वह हमेशा चर्चा करते थे और सभी अहम मुद्दों पर वह सहयोगियों को विश्वास में लेते थे. वह सहयोगियों की भावनाओं का कद्र करते और उनके हितों को समाहित करते थे.

टीडीपी ने गठबंधन धर्म के पालन की मांग की
मंगलवार को टीडीपी सांसदों ने आंध्रप्रदेश पुनर्गठन कानून को पूरी तरह से लागू करने समेत अन्य मांगों को लेकर संसद भवन परिसर में धरना दिया तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वादा पूरा करने की मांग की. टीडीपी सदस्यों ने लोकसभा में भी अपनी मांग को लेकर हंगामा किया जिसके कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी थी. संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना दे रहे टीडीपी सदस्य अपनी हाथों में तख्तियां लिए हुए थे जिस पर भाजपा से गठबंधन धर्म का पालन करने और आंध्र प्रदेश को बचाने की मांग की गई थी. टीडीपी सदस्य ‘मोदी वादा, पूरा करो’ के नारे लगा रहे थे. टीडीपी सांसद जयदेव गल्ला ने कहा कि हम केंद्र सरकार से आंध्रप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करने और राज्य को बचाने की मांग कर रहे हैं. हमने बहुत इंतजार किया है. अब केंद्र को अपना वादा पूरा करना चाहिए. टीडीपी सदस्यों ने रेलवे जोन की घोषणा करने की भी मांग की.

वाजपेयी की पहल को आगे बढ़ाए मोदी सरकार
दो दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति एवं सुलह की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने पर जोर दिया था. राज्य विधानसभा में संसदीय मामलों के मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने कहा था कि क्षेत्र में स्थायी शांति बहाली के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है. यह मुद्दा इससे पहले भी सदन में उठ चुका है. हमारा रुख है कि शांति एवं सुलह एकमात्र जरिया है. संवाद ही एकमात्र रास्ता है. उन्होंने कहा कि स्थायी शांति बहाली की दिशा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से शुरू की गई प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए.

शिवसेना अकेले लड़ेगी लोस चुनाव
पिछले दिनों शिवसेना ने 2019 में अकेले अपने दम पर ही लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. पार्टी ने साफ किया था कि अगला विधानसभा चुनाव भी पार्टी अकेले ही लड़ेगी. पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि पार्टी ने फैसला किया है कि राज्य में वह अपने दम पर आगे चुनाव लड़ेगी और राज्य के बाहर भी हिंदुत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी. बता दें कि राज्य में अभी बीजेपी और शिवसेना की गठबंधन सरकार है. बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है और पिछला चुनाव शिवसेना और बीजेपी ने अकेले अकेले ही लड़ा था. चुनाव परिणामों के बाद सत्ता समीकरण के चलते दोनों दलों में गठबंधन हुआ था और बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनी थी. उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने जो विश्वास उनपर और पार्टी पर जताया है वह उसके आभारी हैं. भाजपा से अलग चुनाव लड़ने का फैसला काफी विचार करने के बाद लिया गया है.