कोलकाता. उच्चतम न्यायालय द्वारा सीबीआई को कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ बलपूर्वक कोई कार्रवाई करने से रोके जाने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार शाम को अपना धरना समाप्त कर दिया. हालांकि उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने तक उनकी जंग जारी रहेगी. सीबीआई द्वारा कुमार से पूछताछ की कोशिश के बाद रविवार शाम को नाटकीय अंदाज में धरने की शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के “अनुकूल” आदेश के बाद समान विचारों वाले राजनीतिक दलों के नेताओं से परामर्श के बाद अपना धरना खत्म कर रही हैं.

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तेदेपा अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ धरना स्थल पर खड़ी ममता ने अपने समर्थकों की भीड़ के समक्ष कहा, “मैं छोड़ूंगी नहीं…मोदी हटाओ, देश बचाओ. यह धरना लोगों की जीत है, देश की जीत है और लोकतंत्र की जीत है. अब मैं यह लड़ाई दिल्ली लेकर जाउंगी.” ममता ने अपना धरना शुरू करते हुए दावा किया था कि मोदी सरकार द्वारा ‘‘संविधान और संघवाद’’ का गला घोंटा जा रहा है. रविवार शाम को सीबीआई का एक दल कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से सारदा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में पूछताछ के लिए पहुंचा था. इससे केंद्र के साथ ममता के नए मोर्चे के लिये जमीन तैयार हुई. सीबीआई अधिकारियों से कोलकाता पुलिस ने धक्का-मुक्की की और उन्हें हिरासत में ले लिया गया. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे “संवैधानिक संकट” करार दिया था.

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लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा विरोधी मोर्चे को एकजुट करने के लिए मुख्य सूत्रधार की जिम्मेदारी निभाने वालों में से एक ममता को 20 से ज्यादा विपक्षी दलों का समर्थन मिला है. ममता ने दावा किया कि केंद्र उनकी सरकार का तख्ता पलटने के लिए साजिश कर रहा है. विपक्षी दलों द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ लड़ाई को “तार्किक अंजाम” तक पहुंचाने पर जोर देते हुए नायडू ने कहा कि उनके नेता 13-14 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी में मुलाकात करेंगे जिससे एक प्रदर्शन कार्यक्रम तैयार किया जा सके. उन्होंने कहा, “लोकतंत्र खतरे में है. हर कोई खतरे में है. अगर कोई अपनी आवाज उठाता है तो आप उन्हें जेल में डाल देते हैं. क्या यह आपातकाल है? यह आपातकाल से भी बुरा है.”

नायडू ने कहा कि 23 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने और बनर्जी ने राकांपा प्रमुख शरद पवार, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव से बात की और सभी ने तत्काल धरना खत्म करने के समर्थन में अपनी राय दी. नायडू ने घोषणा की, ‘‘लेकिन लड़ाई यहां खत्म नहीं होगी. हम दिल्ली में लड़ेंगे. हम इसे तार्किक अंजाम तक लेकर जाएंगे.’’ उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को खुद को सीबीआई के समक्ष पेश करने और सारदा चिट फंड घोटाले की जांच से सामने आए अन्य मामलों में एजेंसी के साथ ‘‘ईमानदारीपूर्वक” सहयोग करने का मंगलवार को निर्देश दिया लेकिन यह भी कहा कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. इस फैसले के आने के कुछ घंटों बाद ही बनर्जी ने अपना धरना खत्म कर दिया. बनर्जी और केंद्र दोनों ही इस अदालती आदेश को अपनी नैतिक जीत बता रहे हैं.

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इधर, लोकसभा में मंगलवार को पश्चिम बंगाल में सीबीआई और कोलकाता पुलिस के बीच टकराव का मुद्दा छाया रहा और इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस, सपा और कांग्रेस के सदस्यों के भारी हंगामे के कारण कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी. बनर्जी ने कहा कि आज का न्यायालय का आदेश “हमारी नैतिक जीत है और इससे लोकसेवकों का मनोबल बढ़ेगा.” केंद्र ने हालांकि कहा कि कुमार को जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने का आदेश पश्चिम बंगाल सरकार के लिए एक झटका है और जांच एजेंसी के लिए नैतिक जीत. भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने न्यायालय के फैसले को पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के लिए करारा झटका बताया और कहा कि यह जांच एजेंसी की नैतिक जीत है. उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को सीबीआई के समक्ष स्वयं को उपलब्ध कराने और सारदा घोटाला जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया है. न्यायालय ने कोलकाता पुलिस प्रमुख कुमार को पूछताछ के लिए शिलांग में सीबीआई के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया. कोलकाता पुलिस प्रमुख की गिरफ्तारी समेत कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा .

सीबीआई ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में आरोप लगाए कि कोलकाता पुलिस के आयुक्त राजीव कुमार ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से छेड़छाड़ की और एजेंसी को ऐसे दस्तावेज सौंपे जिनमें से कुछ में ‘‘छेड़छाड़’’ की गई थी. सारदा चिटफंड घोटाले में कुमार एसआईटी जांच का नेतृत्व कर रहे थे.

(इनपुट – एजेंसी)