नई दिल्ली: कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की कई घंटे तक चली बैठक के बाद सोमवार शाम को फैसला लिया गया है कि फिलहाल सोनिया गांधी ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी. सीडब्ल्यूसी की बैठक में जो फैसला आया है, उससे स्पष्ट है कि ‘वफादार’ ‘असंतुष्टों’ पर भारी पड़े. बैठक में तय हुआ कि सोनिया गांधी अंतरिम पार्टी प्रमुख बनी रहेंगी, जब तक एक नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता है. अगली बैठक छह महीने बाद बुलाई जाएगी. Also Read - अमित शाह से मिले हरियाणा के सीएम खट्टर, नए कृषि कानून और किसानों के मुद्दों पर चर्चा की

हालांकि पूरे दिन चली इस हाई-वोल्टेज ड्रामे वाली बैठक के बाद कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. पार्टी के 23 नेताओं की ओर से नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया को लिखे गए पत्र से खड़े हुए विवाद की पृष्ठभूमि में हुई यह बैठक हंगामेदार रही और इसमें तकरीबन सभी नेताओं ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में विश्वास जताया. अहमद पटेल समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी की कमान सौंपने की पैरवी की. Also Read - मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस ने जारी की 9 उम्मीदवारों की दूसरी सूची

बैठक के बाद भी चिट्ठी से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने आनंद शर्मा पर पत्र लिखने का आरोप लगाया और खेद व्यक्त किया कि आजाद, मुकुल वासनिक और आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता उस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों में शामिल थे. इससे पहले बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने पत्र को दुर्भाग्यपूर्ण बताया जबकि एके एंटनी ने पत्र को क्रूर कहा. Also Read - मध्यप्रदेश: शिवराज सिंह चौहान ने किया ऐसा ट्वीट की भड़क गई कांग्रेस, कर डाली चुनाव आयोग से शिकायत

पार्टी प्रवक्ताओं ने पार्टी में सुधार को लेकर 23 नेताओं की चर्चित चिट्ठी के बारे में कहा कि पार्टी ने तय किया है कि अब हमें इसे भूलकर आगे की ओर बढ़ना है. सीडब्ल्यूसी की बैठक सोनिया गांधी के पद छोड़ने की पेशकश के साथ शुरू हुई और राहुल गांधी ने ‘असंतुष्टों’ द्वारा जारी पत्र के समय पर सवाल उठाया. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ऐसे पहले व्यक्ति रहे, जिन्होंने सोनिया को पद पर बने रहने का अनुरोध किया. वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. के. एंटनी ने पत्र को निर्मम बताया.

सीडब्ल्यूसी की बैठक में अंबिका सोनी और अहमद पटेल सहित वफादारों ने असंतुष्टों को घेरा. उन्होंने पूछा, “ऐसे वरिष्ठ नेता इस तरह की गलती कैसे कर सकते हैं.” इस पर असंतुष्टों ने कहा कि उन्होंने नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाया है, बल्कि वह तो संगठन के एक सुधार के लिए इसका पुनर्निर्माण करना चाह रहे थे.

आनंद शर्मा ने कहा कि यह अनुशासनहीनता नहीं है जबकि मुकुल वासनिक ने पार्टी में अपनी सेवाओं का उल्लेख किया. असंतुष्टों ने यह भी कहा कि उन्हें गांधी परिवार के नेतृत्व से कोई आपत्ति नहीं है और पार्टी को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए सोनिया गांधी की प्रशंसा भी की. सात घंटे की बैठक के दौरान कई बार विवाद हुआ, जब कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि राहुल गांधी ने दावा किया कि यह पत्र ‘भाजपा के साथ मिलीभगत’ में लिखा गया था.

(इनपुट भाषा/आईएएनएस)