नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. वी. रमण ने गुरुवार को सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में एम. नागेश्वर राव की नियुक्ति के केन्द्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के नेतृत्व में नई पीठ बनाई है. मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हुए न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि राव उनके गृह राज्य आंध्र प्रदेश से हैं और वह राव की बेटी की शादी में शामिल हुए थे, जिसका विवाह उनके एक जानकार वकील से हुआ है. न्यायमूर्ति रमण इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करने वाले उच्चतम न्यायालय के तीसरे न्यायाधीश हैं. इससे पहले प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी भी इसकी सुनवाई से खुद को इससे अलग कर चुके हैं.

यह मामला अब नई पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए शुक्रवार को आएगा. न्यायमूर्ति मिश्रा के अलावा न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा भी इसका हिस्सा होंगे. सुप्रीम कोर्ट के जजों के वरिष्ठता क्रम में मिश्रा पांचवें स्थान पर हैं. उनसे पहले प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति सीकरी, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति रमण हैं. न्यायमूर्ति मिश्रा द्वारा इस मामले को सुना जाना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्होंने हाल ही में दिए गए अपने एक फैसले में वकीलों के एक वर्ग की कड़ी आलोचना की थी जो मीडिया में न्यायाधीशों की आलोचना करते हैं और फैसलों को ‘‘राजनीतिक रंग’’ देते हैं.

CBI के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव के खिलाफ याचिका की सुनवाई नहीं करेंगे चीफ जस्टिस, ये रही वजह

न्यायमूर्ति मिश्रा उस वक्त भी कुछ वकीलों के निशाने पर थे जब वह तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश द्वारा दिये गए कुछ संवेदनशील मामलों की सुनवाई कर रहे थे. सूत्रों ने कहा कि उन्होंने 12 जनवरी 2018 को मौजूदा प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई समेत चार न्यायाधीशों द्वारा किए गए संवाददाता सम्मेलनों में उनके द्वारा सुने जा रहे मामलों का जिक्र आने के बाद उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की बैठक में आपत्ति दर्ज कराई थी. गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में राव की नियुक्ति के केन्द्र के फैसले को न्यायालय में चुनौती दी है. यह याचिका गुरुवार को न्यायमूर्ति एनवी रमण, एमएम शांतनगौडर और इंदिरा बनर्जी की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी.

सरकार ने एम नागेश्वर राव को दिया प्रमोशन, सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक होंगे

न्यायमूर्ति रमण ने कहा, ‘‘मैं इस मामले से खुद को अलग करता हूं क्योंकि मैं उन्हें (राव को) जानता हूं क्योंकि वह मेरे गृह राज्य से हैं.’’ कॉमन कॉज की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा, ‘‘क्या मुझे दिल्ली हाईकोर्ट जाना चाहिए? उच्चतम न्यायालय में हर न्यायाधीश मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रहा है.’’ इस पर न्यायाधीश रमण ने कहा, ‘‘अगर मामला एम नागेश्वर राव के बारे में नहीं होता तो मैं इसे सुनता. मैं उनकी (राव) की बेटी की शादी में शामिल हुआ था. उनके (राव के) दामाद वकालत करते हैं. मैं उन्हें जानता हूं.’’ दवे ने इसके बाद पीठ से अनुरोध किया कि मामले को शुक्रवार को किसी दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए.

एम नागेश्वर ने कहा- पत्नी की संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोप गलत

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मामले को एक ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसका हममें से एक (एनवी रमण) सदस्य न हों.’’ पीठ ने कहा कि रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह मामले को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए प्रधान न्यायाधीश के सामने रखे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा आलोक कुमार वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद नए निदेशक की नियुक्ति तक 10 जनवरी को सीबीआई में अतिरिक्त निदेशक राव को एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त किया गया था.