चेन्नई. मशहूर वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन (MS Swaminathan) के आयोग वाली जिस रिपोर्ट को लागू कराने और अन्य मांगों को लेकर देशभर के किसान बीते गुरुवार से दिल्ली में थे और शुक्रवार को संसद तक का मार्च निकाल रहे थे, उस वैज्ञानिक को इस बात का अफसोस है कि केंद्र हो या राज्य की सरकारें, कोई भी किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं देती. दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए एम.एस. स्वामीनाथन ने कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार के खिलाफ भी अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने शुक्रवार को कहा कि 2007 में संप्रग सरकार ने राष्ट्रीय किसान नीति (एनपीएफ) पर कोई कदम नहीं उठाया, जिसमें कृषि को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए उसकी बेहतरी के सुझाव दिए गए थे. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को किसानों के दुख-दर्द के समाधान के लिए मूल्य निर्धारण, खरीद और सार्वजनिक वितरण पर ध्यान देना चाहिए. Also Read - BJP अध्‍यक्ष JP Nadda के निवास पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर ने की मीटिंग

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वैज्ञानिक स्वामीनाथन ने कहा, ‘‘कर्ज माफी की मांग कृषि की वर्तमान गैर लाभकारी प्रकृति से उत्पन्न होती है और यह इस तथ्य का संकेत है कि आर्थिक व्यावहारिकता जितनी उद्योगपतियों के लिए महत्वपूर्ण है, उतनी ही किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है.’’ स्वामीनाथन ने कहा कि किसान आंदोलन कृषि अशांति का सबूत है और वे (किसान) इस निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं कि तार्किकता से नहीं, बल्कि आंदोलन से ही उनकी समस्याओं के हल के लिए कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे अफसोस है कि चुनावी राजनीति में कर्ज माफी जैसे समाधानों को ही महत्व दिया जाता है.’’

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किसानों की समस्या को लेकर स्वामीनाथन ने कहा कि किसानों की मूलभूत समस्याओं से केवल तभी पार पाया जा सकता है जब मूल्य निर्धारण, खरीद और सार्वजनिक वितरण पर समग्र ध्यान दिया जाए. कृषि वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, जब 2007 में राष्ट्रीय किसान नीति संबंधी रिपोर्ट पेश की गई थी तब उस समय की सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया.’’ एनपीएफ के नीति लक्ष्यों में किसानों की विशुद्ध आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर कृषि की आर्थिक व्यावहारिकता में सुधार लाना शामिल था. 2007 में तत्कालीन कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने एनपीएफ को मंजूर किया था और नीतिगत प्रारूप स्वामीनाथन ने तैयार किया था, जो उस समय राष्ट्रीय किसान आयोग (एनसीएफ) के अध्यक्ष थे.

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स्वामीनाथन ने कहा कि एनसीएफ की सिफारिश के आधार पर केंद्र (राजग सरकार) पहले ही कृषि मंत्रालय का नाम बदलकर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय कर चुका है. उन्होंने कहा, ‘‘नाम में यह बदलाव केंद्र और राज्यों में कृषि मंत्रालयों के मुख्य उद्देश्य के रुप में किसान कल्याण के संवर्धन के लिए निर्धारित कार्य के रूप में परिलक्षित होना चाहिए.’’ आंदोलन के संदर्भ में उन्होंने इस बात पर अफसोस प्रकट किया कि जीवन प्रदान करने वाले किसानों को आर्थिक कारणों से अपनी जान देनी पड़ती है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं आशा करता हूं कि आज का किसान मुक्ति मोर्चा कृषि के क्षेत्र में सार्वजनिक नीति के निर्माण के इतिहास में एक अहम मोड़ होगा.’’

(इनपुट – एजेंसी)