कांग्रेस ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तमिलनाडु की एक चुनावी रैली में 3600 करोड़ रूपये के अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा मुद्दे पर इतालवी अदालत द्वारा सोनिया गांधी का नाम लिए जाने संबंधी कथित बयान दिए जाने का मुद्दा लोकसभा में उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री के ऐसे बयान से प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई जांच प्रभावित हो सकती है।

वही दूसरी तरफ कांग्रेस ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के उस दावे के लिए सोमवार को कटु आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा कि राज्यसभा में पेश किए गए अगस्ता वेस्टलैंड सौदे के दस्तावेजों को सभापति ने ‘अनुमोदित’ किया है। यह भी पढ़े-अगस्ता वेस्टलैंड मुद्दे पर राज्यसभा में जयराम, स्वामी में तकरार

हालांकि उपसभापति पी.जे. कुरियन ने स्पष्ट किया कि कोई दस्तावेज प्रमाणित नहीं किया गया है। इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष से इसे तत्काल उठाने का मौका नहीं मिलने पर कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वाकआउट भी किया। हालांकि वे कुछ देर बाद वापस आ गए। निचले सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे तत्काल इसे उठाने देने की मांग कर रहे थे। हालांकि अध्यक्ष ने शून्यकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के इदरिश अली का नाम पुकारा। कांग्रेस सदस्यों ने इसका विरोध किया।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “डा. स्वामी को सच बोलने की आदत नहीं है। वह कहते हैं कि उनके दस्तावेजों को राज्यसभा ने अनुमति दी है। राज्यसभा ने इसे कैसे अनुमोदित कर दिया?” यह भी पढ़े-अगस्तावेस्टलैंड डील: रक्षा मंत्री- जो काम हम बोफोर्स में नहीं कर सके, अगस्ता में करेंगे

खड़गे ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और प्रधानमंत्री ऐसे बयान देते हैं तब इससे प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई जांच प्रभावित होगी। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चर्चा के दौरान किसी ने किसी का नाम नहीं लिया था तब प्रधानमंत्री ऐसा कैसे कर सकते हैं। हम ऐसे बयान की निंदा करते हैं। इसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। कांग्रेस नेता अहमद पटेल, राजीव शुक्ला और मोतीलाल बोरा सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलेंगे।

गौरतलब है कि अगस्ता वेस्टलैंड के मामले में कांग्रेस का कहना है कि सरकार दुर्भावना से काम कर रही है। पारदर्शी नियम और कानून के तहत ही हेलिकॉप्टरों की खरीद की गई। कांग्रेस ने कुछ दिनों पहले अगस्ता के मुद्दे पर लोकतंत्र बचाओ मार्च निकाला था और मोदी सरकार पर तीखे हमले किेए थे।