नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने मुख्य आर्थिक सलाहकार पद के लिए शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता संबंधी शर्तों में ढील दिए जाने का आरोप लगाया और सवाल किया कि आखिर इसके पीछे का मकसद क्या है. Also Read - यूपीए का हिस्‍सा बने उपेंद्र कुशवाहा, 'दिलों के बंधन' से महागठबंधन को मिलेगी मजबूती!

पटेल ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, ‘‘सरकार ने मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद के लिए शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता संबंधी शर्तों में ढील क्यों दी है? यहां तक कि बैंकों में भी अर्थशास्त्री के पद के लिए इससे कड़ी शर्तें होती हैं.’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘इसके पीछे का छुपा हुआ मकसद क्या है?’’ Also Read - National e-Way bill system will be implemented from 1st April | 1 अप्रैल से नेशनल ई-वे बिल व्यवस्था लागू

हाल ही में अरविंद सुब्रमण्यम ने मुख्य आर्थिक सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था. अब इस पद के लिए वित्त मंत्रालय ने आवेदन मांगे हैं. आवेदन करने के लिए आखिरी तिथि 20 जुलाई है.

इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री ले चुके प्रोफेशनल इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, फाइनेंस या इकोनॉमिक्स में पीएचडी करने वालों को वरीयता दी जाएगी. आवेदन करने वाले सरकारी कर्मचारियों के पास इकोनॉमिक रिसर्च या आर्थिक सलाह देने का छह साल का अनुभव अनिवार्य है. सार्वजनिक उपक्रमों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कर्मियों के अलावा सरकारी कर्मचारी, यूनिवर्सिटी तथा रिसर्च संस्थानों में काम करने वाले भी आवेदन कर सकते हैं. आवेदकों के लिए अधिकतम उम्र सीमा 56 साल है.

हालांकि, अनुमान यह लगाया जा रहा था कि अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में केंद्र सरकार शायद नए मुख्य आर्थिक सलाहकार की नियुक्ति न करे. अरविंद सुब्रमण्यम का कार्यकाल मई, 2019 तक था. तय समय से पहले उनके पद छोड़ने के चलते सरकार के सामने कोई विकल्प नहीं बचा. नए मुख्य आर्थिक सलाहकार के कार्यकाल को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, खासकर यदि 2019 में होने वाले आम चुनावों के बाद नई सरकार सत्ता में आती है, तो वह अपने पसंदीदा व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त कर सकती है.