80 करोड़ का पुल बनाया... लेकिन आगे दीवार! डेढ़ साल पहले तैयार, अब तक उद्घाटन नहीं! ये घोटाला या किसी की लापरवाही?

मीडिया रिपोर्ट्स में इसे गुजरात मॉडल की लापरवाही का प्रतीक बताया जा रहा है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में फीजिबिलिटी स्टडी और कनेक्टिविटी प्लानिंग कैसे चूक गई? जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग हो रही है.

Published date india.com Published: February 5, 2026 6:03 AM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

अहमदाबाद के बोपल इलाके में घूमा और शिलज के बीच रेलवे लाइन के ऊपर बना एक रेलवे ओवर ब्रिज इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. यह पुल करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है, लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इसका आधिकारिक उद्घाटन नहीं हो पाया है. यह मामला सरकारी योजनाओं में खराब प्लानिंग, समन्वय की कमी और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है, जिस पर सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा मीडिया तक में जमकर चर्चा हो रही है. यह ब्रिज अहमदाबाद अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (AUDA) और भारतीय रेलवे के संयुक्त प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य बोपल-घुमा क्षेत्र से शिलज की ओर जाने वाले वाहनों के लिए रेलवे लाइन को सुरक्षित पार करने की सुविधा उपलब्ध कराना था.

जानिए क्यों लगता था जाम

इस इलाके में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, आवासीय कॉलोनियों और ट्रैफिक के बोझ के कारण रेलवे क्रॉसिंग पर लंबे समय तक जाम लगता था, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती थी. पुल बनने से इस समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद जताई गई थी. निर्माण कार्य मुख्य रूप से 2019 से शुरू होकर 2024 के आसपास पूरा हुआ.

जानिए कैसा है पुल का डिजाइन

पुल की लंबाई और डिजाइन ऐसी है कि यह रेलवे ट्रैक को ऊपर से पार करता है, जिससे लेवल क्रॉसिंग की जरूरत खत्म हो जाती. लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब पुल शिलज छोर पर पहुंचते ही अचानक खत्म हो जाता है. पुल से उतरते ही सामने एक ठोस दीवार आ जाती है, और उसके आगे कोई सड़क नहीं है. बस कृषि भूमि (खेती की जमीन) फैली हुई है. यानी पुल एक तरफ से तो तैयार है, लेकिन दूसरी तरफ से जुड़ने वाली कनेक्टिंग रोड (लगभग 300 मीटर से 2 किमी तक की सड़क) अभी तक नहीं बन पाई है.

इस वजह से पुल व्यावहारिक रूप से इस्तेमाल के लायक नहीं है. लोग इसे “पुल टू नोवेयर” या “दीवार पर खत्म होने वाला ब्रिज” कहकर मजाक उड़ा रहे हैं. वजह सामने आई है कि शिलज की मुख्य सड़क से पुल को जोड़ने के लिए उस जमीन का टाउन प्लानिंग स्कीम (TP स्कीम) या लैंड यूज चेंज की मंजूरी जरूरी है, क्योंकि वह इलाका अभी कृषि जोन में आता है.

पुल की लागत

सरकारी विभागों के बीच समन्वय न होने से यह मंजूरी लंबित पड़ी हुई है. AUDA और रेलवे ने कई बार पत्राचार किया, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने से सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका. कुछ रिपोर्ट्स में पुल की लागत 65 करोड़ से 80 करोड़ तक बताई गई है, जिसमें AUDA और रेलवे की हिस्सेदारी शामिल है.स्थानीय लोग अब भी जोखिम उठाकर पुल का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह बंद है. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद फरवरी 2026 में यह खबर फिर से सुर्खियों में आई.

AUDA अधिकारियों का कहना है कि TP मंजूरी मिलते ही सड़क बनाई जाएगी और ब्रिज को चालू किया जाएगा. लेकिन फिलहाल यह पुल करीब डेढ़ साल से “बंद” पड़ा है, और जनता का 80 करोड़ का पैसा बिना उपयोगिता के लटका हुआ है. यह घटना सरकारी परियोजनाओं में बेहतर प्लानिंग और विभागीय तालमेल की जरूरत को रेखांकित करती है.

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