गुवाहाटी में AI से ब्लैकमेलिंग! छात्राओं-शिक्षिकों की डीपफेक तस्वीरें वायरल- जांच के घेरे में कई छात्र- जानें पूरा मामला

Written By: Parinay Kumar Updated by: Parinay Kumar
Updated Date:June 13, 2026 4:26 PM IST

पुलिस ने बताया कि कुछ आपत्तिजनक डीपफेक तस्वीरें सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर फैलाई गईं. साइबर क्राइम की टीम अब मामले की जांच कर रही है.

गुवाहाटी के एक फेमस स्कूल में एक गंभीर साइबर क्राइम मामला सामने आया है. इसकी वजह से सेंट फ्रांसिस डी सेल्स (SFS) स्कूल के कुछ छात्र जांच के घेरे में आ गए हैं. आरोप है कि कुछ छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से छात्राओं और शिक्षकों की नकली (Deepfake) तस्वीरें बनाई और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर किया. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ डिजिटली छेड़छाड़ की गई आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम पर फैलाई गईं. इन तस्वीरों को उन लोगों की जानकारी और अनुमति के बिना बनाया और शेयर किया गया, जिनकी फोटो का इस्तेमाल किया गया था.

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साइबर क्राइम की टीम कर रही जांच

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ये तस्वीरें किसने बनाई, इन्हें कैसे फैलाया गया और क्या इन्हें पैसों के बदले किसी को दिया गया था? मामला अब असम पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच तक पहुंच चुका है. अधिकारी मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और ऑनलाइन चैट की जांच कर रहे हैं. स्कूल प्रशासन ने 12 जून को इस घटना की जानकारी दी. स्कूल ने तुरंत मामले को अपनी आंतरिक समितियों के पास भेजा, जिसमें चाइल्ड एब्यूज मॉनिटरिंग कमेटी (CAMC) भी शामिल है. स्कूल ने शुरुआती जांच शुरू कर दी है और संबंधित अभिभावकों से भी बातचीत की गई है.

कई छात्र हुए सस्पेंड

जांच पूरी होने तक मामले से जुड़े छात्रों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है. स्कूल ने कहा है कि जांच के बाद नियमों और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. स्कूल ने साफ कहा है कि वह साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, डिजिटल प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल और ऐसी किसी भी गतिविधि को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगा, जिससे छात्रों या शिक्षकों की सुरक्षा, सम्मान और निजता को नुकसान पहुंचे.

डीपफेक ने फिर बढ़ाई चिंता

इस घटना ने AI और डीपफेक तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ऐसी तकनीक का गलत उपयोग किसी व्यक्ति की छवि, मानसिक शांति और निजी जीवन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर जब बच्चे इसका शिकार बनते हैं. इस मामले से एक बड़ी सीख मिलती है कि आज के डिजिटल समय में हमें तकनीक का इस्तेमाल बहुत जिम्मेदारी से करना चाहिए. बच्चों की तस्वीरें ऑनलाइन शेयर करते समय सावधानी रखनी चाहिए और छात्रों को भी साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करना जरूरी है.

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