Ai Misinfo Deepfake Under Scanner As Government Brings Tougher It Rules For Social Media Platforms
AI फोटो-VIDEO को लेकर सरकार सख्त, नई गाइडलाइंस जारी; एक गलती और नप जाएंगे आप!
सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रहे डीपफेक और भ्रामक AI कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए सख्त IT नियम लागू किए. नई गाइडलाइन के तहत अब AI से बनाई फोटो, वीडियो और ऑडियो को पोस्ट करते समय साफ तौर पर लेबल करना जरूरी होगा.
Guideline for AI Photos-Videos: सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते डीपफेक और भ्रामक AI कंटेंट को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. नए और सख्त IT नियमों के तहत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाई गई या बदली गई तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो शेयर करना आसान नहीं होगा. सरकार का मकसद ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकना, गलत सूचना पर लगाम लगाना और आम यूजर्स को गुमराह होने से बचाना है.
नए कानून के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अगर AI से जनरेट या एडिट किया गया कंटेंट सोशल मीडिया पर अपलोड करता है, तो उसे साफ तौर पर यह बताना होगा कि यह कंटेंट असली नहीं है. चाहे वह फोटो हो, वीडियो हो या ऑडियो हर AI कंटेंट पर स्पष्ट डिस्क्लोजर जरूरी होगा. अगर ऐसा नहीं किया गया, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और कार्रवाई हो सकती है.
अफवाहों पर लगेगी रोक
सिर्फ यूजर्स ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है. इंस्टाग्राम, X (पूर्व में ट्विटर) और अन्य प्लेटफॉर्म्स को अब AI से बने कंटेंट को साफ तौर पर लेबल करना होगा, ताकि देखने वाला ये समझ सके कि वह किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना को नहीं दिखाता. इससे डीपफेक के जरिए फैलाए जाने वाले झूठ और अफवाहों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
इस कानून की एक अहम शर्त ये भी है कि AI से बने कंटेंट में डिजिटल पहचान यानी मेटाडेटा जोड़ना अनिवार्य होगा. इस मेटाडेटा के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि कंटेंट किस AI टूल से बनाया गया है. इससे भविष्य में अगर किसी कंटेंट का गलत इस्तेमाल होता है, तो उसकी ट्रेसिंग और जिम्मेदारी तय करना आसान होगा.
सरकार ने अवैध और नुकसानदेह कंटेंट हटाने की समय-सीमा भी काफी कम कर दी है. पहले सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय मिलता था, लेकिन अब यह सीमा घटाकर सिर्फ तीन घंटे कर दी गई है. इसका मतलब है कि अगर कोई डीपफेक या गैरकानूनी कंटेंट रिपोर्ट होता है, तो प्लेटफॉर्म को तुरंत कार्रवाई करनी होगी.
2 घंटे के अंदर ली जाएगी शिकायत
ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम को भी तेज किया गया है. अब प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की शिकायत दो घंटे के भीतर स्वीकार करनी होगी, जबकि पहले इसके लिए 24 घंटे का समय था. शिकायत का समाधान भी सात दिनों के अंदर करना होगा, जो पहले 15 दिन था. इससे पीड़ित यूजर्स को जल्दी राहत मिलने की उम्मीद है.
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डिजिटल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम सही दिशा में है, क्योंकि AI तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उसका दुरुपयोग भी हो रहा है. डीपफेक वीडियो के जरिए फर्जी बयान, फेक तस्वीरें और झूठी खबरें न सिर्फ लोगों को गुमराह करती हैं, बल्कि समाज और लोकतंत्र के लिए भी खतरा बन सकती हैं.
सरकार का कहना है कि नए IT नियम किसी की अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करने के लिए नहीं हैं, बल्कि डिजिटल स्पेस को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए लाए गए हैं. आने वाले समय में इन नियमों के प्रभाव से सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी और पारदर्शिता दोनों बढ़ने की उम्मीद है.
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