AIIMS New Rules: नए साल की शुरुआत में देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम्स ने इलाज को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं. एम्स प्रशासन का कहना है कि अस्पताल के पास संसाधन सीमित हैं, इसलिए गंभीर और जटिल मरीजों को समय पर बेहतर इलाज देना जरूरी है. इसी वजह से एम्स ने मरीजों और उनके परिजनों से सहयोग की अपील की है. प्रशासन का मानना है कि अगर सामान्य बीमारियों का दबाव कम होगा, तो सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं और अच्छी तरह से दी जा सकेंगी.
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है एम्स
एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने साफ कहा है कि एम्स रोजमर्रा की छोटी बीमारियों के इलाज के लिए नहीं बना है. खांसी, जुकाम, हल्का बुखार या सामान्य जांच के लिए स्थानीय सरकारी और निजी अस्पताल बेहतर विकल्प हैं. एम्स की असली भूमिका उन मरीजों के इलाज में है, जिनकी बीमारी गंभीर हो या जिनका इलाज अन्य अस्पतालों में संभव न हो. ऐसे जटिल मामलों के लिए ही एम्स बनाया गया है.
बिना जरूरत आने से बढ़ती है दिक्कत
डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे मरीज एम्स पहुंच जाते हैं, जिनका इलाज सामान्य अस्पतालों में आसानी से हो सकता है. इससे एम्स में भीड़ बढ़ती है और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलने में परेशानी होती है. अगर मरीज सही स्तर के अस्पताल में इलाज कराएं, तो एम्स का बोझ कम होगा और सेवाएं ज्यादा असरदार बनेंगी. हर साल एम्स की ओपीडी में करीब 50 लाख मरीज आते हैं, जो कई छोटे देशों की आबादी से भी ज्यादा है.
ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और रेफरल को प्राथमिकता
एम्स प्रशासन ने ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सिस्टम को और मजबूत करने का फैसला लिया है. अब पहले से ऑनलाइन समय लेकर आने वाले मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी. बिना अपॉइंटमेंट पहुंचने पर मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. इसके अलावा, अन्य अस्पतालों से रेफर होकर आने वाले मरीजों को भी वरीयता दी जाएगी. एम्स का कहना है कि रेफरल मरीज ही उसकी असली जिम्मेदारी होते हैं, क्योंकि इन्हें विशेषज्ञों के इलाज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है,
डिजिटल व्यवस्था से सुधरेगा इलाज
अस्पताल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एम्स ने कामकाज को और डिजिटल करने का फैसला लिया है. अब डॉक्टरों और स्टाफ की ऑन-कॉल ड्यूटी की जानकारी एक ऑनलाइन डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी. इससे इमरजेंसी के समय तुरंत पता चल सकेगा कि कौन डॉक्टर या मेडिकल टीम ड्यूटी पर है. सभी विभाग अपने ऑन-कॉल रोस्टर एम्स के इंट्रानेट पर अपलोड करेंगे। 1 अप्रैल से यही सिस्टम आधिकारिक होगा और मैन्युअल प्रक्रिया लगभग खत्म हो जाएगी. इससे इलाज में देरी कम होगी और मरीजों को समय पर बेहतर सुविधा मिल सकेगी.
