Covid-19 is not a serious disease: कोरोना वायरस से संक्रमण को लेकर दुनिया भर में मचे हाहाकार के बीच देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोविड-19 कोई गंभीर बीमारी नहीं है. दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि कोविड-19 के 90 से 95 फीसदी मरीज ठीक हो जाते हैं. ऐसे में हमें यह याद रखना होगा कि यह कोई बहुत गंभीर बीमारी नहीं है. Also Read - बिहार में Coronavirus के 133 नए मामले, बढ़कर कुल 2870 हुए, पढ़े जिलेवार डिटेल

डॉ. गुलेरिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश और दुनिया में कोविड-19 के इलाज को लेकर एक अलग तरह की धारणा बनती जा रही है. उन्होंने कहा कि इस बीमारी और इसके इलाज के जुड़ी बेवजह की धारण या कंलक से बड़ी संख्या में मरीज परेशान हो रहे हैं. Also Read - ब्रिटेन में पीएम के मुख्‍य सलाहकार ने किया था लॉकडाउन का उल्लंघन, उप मंत्री ने दिया इस्तीफा

उन्होंने कहा कि ऐसी धारण या कलंक की वजह से मृत्य दर बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि इस धारणा या कलंक की वजह से जो मरीज कोविड-19 या फ्लू जैसी बीमारी का लक्षण होने पर जल्दी अस्पताल नहीं आ रहे हैं. Also Read - कोरोना मामले पर स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान- प्रतिबंधों में ढील के कारण 5 राज्यों में बढ़ें संक्रमण के मामले

उन्होंने आगे कहा कि अगर इस बीमारी के साथ ऐसा कलंक जुड़ेगा और हम आगे नहीं आएंगे तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी. समय पर इलाज नहीं होने की वजह से मृत्यु दर काफी बढ़ सकती है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि कोविड-19 के अधिकतर मरीज को केवल सपोर्टिव ट्रीटमेंट की जरूरत होती है. केवल 15 फीसदी को दवाइयों के साथ ऑक्सीजन थैरेपी की जरूरत पड़ती है. डॉ. गुलेरिया ने कहा कि देश के अस्पतालों में विभिन्न दवाइयों और नई वैक्सीन का परीक्षण चल रहा है.