नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना के उपप्रमुख एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने गुरुवार को दसाल्ट एविएशन द्वारा भारत के लिए बनाए गए पहले राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाया. आधिकारिक सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि चार दिन पहले पेरिस पहुंचे नांबियार ने इसकी क्षमता का आकलन करने के लिए फ्रांस में यह विमान उड़ाया.

दसाल्ट एविएशन द्वारा राफेल विमान बनाए जाने की प्रगति का जायजा लेने के लिए वह फ्रांस गए हैं. सूत्रों ने बताया कि एयर मार्शल नांबियार ने भारत के लिए दसाल्ट द्वारा बनाया गया पहला राफेल लड़ाकू विमान उड़ाया.

अगले साल सितंबर से मिलेंगे राफेल

इन विमानों को भारत को सौंपने का काम अगले साल सितंबर से शुरू होगा. भारत के लिहाज से विमान तैयार करने और उसमें हथियार प्रणाली शामिल करने में दसाल्ट एविएशन की मदद करने के लिए भारतीय वायु सेना की एक टीम पहले से ही फ्रांस में मौजूद है. राफेल लड़ाकू विमानों की सरकारी खरीद से जुड़े समझौते पर जारी विवाद के बीच यह खबर आई है.

सुलगते विवाद के बीच राफेल विमानों पर वायु सेना के पायलटों को मिलेगी ट्रेनिंग

36 राफेल विमानों पर समझौता

बता दें कि भारत ने 58,000 करोड़ रुपये की लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ एक अंतर सरकारी समझौता किया है. जेट विमानों की डिलीवरी सितंबर 2019 से शुरू होने वाली है. कांग्रेस ने विमान की कथित रूप से बढ़ी हुई दर सहित सौदे के बारे में कई सवाल उठाए हैं लेकिन सरकार ने आरोपों को खारिज कर दिया है. कांग्रेस इसे लेकर लगातार सरकार पर हमलावर है. वहीं, सरकार का कहना है कि यूपीए शासन में महंगा सौदा किया गया था जबकि एनडीए सरकार में विमानों के दाम कम कराए गए हैं.

राफेल विवाद में कूदे उद्योगपति अनिल अंबानी, कहा- केंद्र सरकार ने नहीं दिलवाया ठेका

बता दें कि राफेल खरीद पर इन दिनों बड़ा विवाद मचा हुआ है. कांग्रेस लगातार सरकार पर आरोप लगा रही है कि इस सौदे में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है और उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बड़ा हेरफेर किया गया. वहीं, अनिल अंबानी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया है कि उनके रिलायंस समूह के पास राफेल लड़ाकू जेट बनाने के लिए अनुभव की कमी है. अंबानी ने यह भी कहा कि फ्रांसीसी समूह दसॉल्ट द्वारा उनकी कंपनी को स्थानीय भागीदार के रूप में चुनने में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी.