नई दिल्ली. इसे पड़ोसी देश चीन की दबंगई कहें या धौंस, भारत सरकार इसके प्रभाव में आ गई है. चीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दुनिया की सभी विमानन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वह ताईवान की जगह, ‘चाइनीज ताइपे’ का इस्तेमाल करे. इसका सीधा सा मतलब यह है कि ताईवान अब दुनिया की नजर में देश नहीं, बल्कि चीन के एक राज्य के बतौर गिना जाएगा. चीनी धौंस का असर है कि देश की सरकारी विमान कंपनी एअर इंडिया ने अपने गंतव्य देशों की लिस्ट से ताईवान का नाम हटा दिया है. अब अगर किसी को एअर इंडिया की फ्लाइट से ताईवान जाना हो तो उसे ‘चाइनीज ताइपे’ लिखना पड़ेगा. एअर इंडिया के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी है. विमानन कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इस बाबत सूचना दे दी गई है. Also Read - अमेरिका में चीन के खिलाफ प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों ने पूछा-वायरस कौन, जवाब मिला ये-देखें वीडियो

चीनी दबाव में कई विमानन कंपनियों ने बदला नाम
ताईवान की जगह चाइनीज ताइपे शब्द का इस्तेमाल करने पर चीन ने पिछले दिनों आपत्ति दर्ज की थी. विभिन्न वैश्विक विमानन कंपनियों द्वारा ताईवान को अलग क्षेत्र बताए जाने पर चीन सरकार की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने आपत्तियां जताई थी. इसके बाद डेल्टा एयरलाइंस, क्वांटास, सिंगापुर एयरलाइंस, जापान एयरलाइंस और एयर कनाडा ने कठिनाइयों से बचने के लिए ताईवान की जगह चाइनीज ताइपे लिखना शुरू कर दिया है. गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में चीन में डेल्टा एयरलाइंस की सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. ऐसा इसलिए क्योंकि डेल्टा एयरलाइंस की वेबसाइट पर ताईवान और तिब्बत को अलग देशों की श्रेणी में रखा गया था. चीनी एविएशन अथॉरिटी ने इस पर डेल्टा एयरलाइंस से तत्काल सार्वजनिक तौर पर गलती स्वीकारने और माफी मांगने को कहा था. बता दें कि डेल्टा एयरलाइंस के गलती मानने के बाद ही उसे फिर से चीन में उड़ान की अनुमति दी गई. भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एअर इंडिया ने भी ताईवान की जगह चाइनीज ताइपे नाम इस्तेमाल करने की घोषणा कर दी है. एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि वेबसाइट पर ताईवान का नाम बदलने में विदेश मंत्रालय के सुझाव का पालन किया गया है. Also Read - विदेश मंत्री जयशंकर बोले- भारत और चीन पर दुनिया का बहुत कुछ निर्भर करता है

इसी साल अप्रैल में भारत और चीन के बीच दि्वपक्षीय संबंधों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वार्ता हुई थी. (फोटो साभारः नरेंद्रमोदी.इन)

इसी साल अप्रैल में भारत और चीन के बीच दि्वपक्षीय संबंधों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वार्ता हुई थी. (फोटो साभारः नरेंद्रमोदी.इन)

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पीएम मोदी के दौरे से पहले दिया गया था आदेश
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, चीनी विमानन एजेंसी द्वारा एअर इंडिया को ताईवान का नाम बदलने का यह आदेश पीएम नरेंद्र मोदी के हालिया चीन दौरे से महज 2 दिन पहले दिया गया है. अप्रैल के अंतिम हफ्ते में जब पीएम मोदी चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने वुहान गए थे, उसके दो दिन पहले 25 अप्रैल को चीनी विमानन एजेंसी ने एअर इंडिया समेत विश्व की तमाम विमानन कंपनियों को ताईवान की जगह चाइनीज ताइपे करने के संबंध में आदेश जारी किया था. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार हालांकि भारत सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से चीनी विमानन एजेंसी के इस आदेश को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. उधर, अमेरिकी विमानन कंपनियों ने चीनी एजेंसी के इस आदेश को लेकर आपत्ति जताई है. अखबार के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि कोई चीनी एजेंसी, अमेरिकी कंपनियों के लिए इस तरह का दिशा-निर्देश जारी करे. अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा, ‘हम चीनी एजेंसी की अमेरिकी कंपनियों के काम-काज में दखलअंदाजी संबंधी आदेश पर विचार कर रहे हैं.’

ताईवान का स्वतंत्र रहना ‘वन चाइना’ पॉलिसी के लिए खतरा
ताईवान भी खुद को पूर्वी एशिया में एक लोकतांत्रिक संप्रभु राष्ट्र मानता रहा है. इस पर चीन को आपत्ति है. चीनी सरकार ताईवान के चीन से अलग होने की बात को सिरे से नकारती रही है. ताईवान को चीन का हिस्सा मानने के पीछे चीन सरकार की ‘वन चाइना’ पॉलिसी है. इसके तहत चीन, ताईवान को इस विशाल देश के एक राज्य का दर्जा देता है. चीन की हमेशा से मंशा रही है कि ताईवान को विश्व के सभी देश, चीन का ही हिस्सा मानें, न कि उसे अलग देश के तौर पर मान्यता दें. ऐसे में दूसरे देशों के साथ ताईवान के सौहार्दपूर्ण रिश्ते को लेकर भी चीनी आपत्ति जताता रहा है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारत और ताईवान के बीच वर्षों से मजबूत द्विपक्षीय संबंध रहे हैं. दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध हों या व्यापारिक संबंध, भारत और ताईवान एक-दूसरे के साझीदार रहे हैं. भारत ने भी चीन की ‘वन चाइना’ पॉलिसी को स्वीकृति दी है, बावजूद इसके ताईवान के साथ अभी तक हमारे स्वतंत्र संबंध रहे हैं. भारत-ताईपे एसोसिएशन के तहत भारत सरकार का एक कार्यालय भी है. यहां तक कि विदेश सचिव विजय गोखले वर्षों तक इस कार्यालय में अपनी सेवा दे चुके हैं.

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चीन की दबंगई के आगे सभी बेबस
ताईवान की जगह चाइनीज ताइपे करने के प्रति चीन सरकार की यह दबंगई, नई नहीं है. इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वर्ल्ड बैंक को भी चीन सरकार ने ताईवान की जगह चाइनीज ताइपे नाम इस्तेमाल करने को मजबूर किया है. यह भी गौरतलब है कि ताईवान ने भी अब तक इसको लेकर सार्वजनिक तौर पर विरोध प्रकट नहीं किया. यही वजह है कि दुनिया के किसी भी संगठन के सदस्य देशों में ताईवान का नाम, देश के तौर पर दर्ज नहीं है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की बैठक में भी वह चाइनीज ताइपे के नाम से ही आमंत्रित किया जाता है. इसके अलावा 1998 में हुई ‘मिस वर्ल्ड’ सौंदर्य प्रतियोगिता में भी चीन सरकार के दबाव की वजह से मिस रिपब्लिक ऑफ चाइना की जगह मिस चाइनीज ताईपे का नाम इस्तेमाल किया गया. इसके बाद से यह देश इसी नाम से इन प्रतियोगिताओं में भाग लेता रहा है.