नई दिल्ली. दिल्ली की वायु गुणवत्ता मंगलवार को लगातार चौथे दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रही. वहीं अधिकारियों ने कहा कि तेज हवाएं चलने से कुछ राहत मिल सकती है और वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 408 रहा जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है. वहीं, केंद्र की वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूर्वानुमान प्रणाली (सफर) ने बताया कि एक्यूआई 385 है जो बहुत खराब श्रेणी में आती है. प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद, देश के शीर्ष चिकित्सक संस्थान एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि खराब वायु गुणवत्ता के कारण अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है.

सीपीसीबी के मुताबिक, 23 इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर था जबकि 12 क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब थी. एनसीआर में, गाजियाबाद की वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ रिकॉर्ड की गई जबकि फरीदाबाद, गुड़गांव और नोएडा में प्रदूषण का स्तर बहुत खराब था. सीपीसीबी ने कहा कि समग्र पीएम 2.5 का स्तर 263 रिकॉर्ड किया गया और पीएम 10 का स्तर 400 रहा. दिल्ली की वायु गुणवत्ता शनिवार को ‘गंभीर’ श्रेणी में चली गई थी. राष्ट्रीय राजधानी में साल में दूसरी बार सबसे ज्यादा प्रदूषण स्तर रिकॉर्ड किया गया. तब एक्यूआई 450 दर्ज किया गया था.

निर्माण पर प्रतिबंध
सफर के मुताबिक, हवा की गति में बढ़ोतरी के कारण दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना है. इसने कहा कि तेजी से छितराव के कारण पूर्वानुमान मॉडल ने तेजी से सुधार का पूर्वानुमान जताया है. एक्यूआई आज रात से अगले तीन दिन तक बहुत गंभीर श्रेणी में चला जाएगा. भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, वायु गुणवत्ता में सुधार होने के आसार हैं लेकिन यह ‘बहुत खराब से गंभीर’ श्रेणी में बनी रहेगी. राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के गंभीर श्रेणी में जाने के बाद, वजीरपुर, मुंडका, नरेला, बवाना, साहिबाबाद में औद्योगिक गतिविधियों तथा समूचे दिल्ली एनसीआर में बुधवार तक निर्माण गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया है.

अधिकारियों ने ये कहा
ईपीसीए के अध्यक्ष भूरे लाल ने कहा कि ये बुधवार तक बंद रहेंगी. संबंधित एजेंसियों को अवैध उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, जमीनी कार्रवाई तेज करने तथा प्रदूषक गतिविधियों, खासतौर पर, कचरा जलाने को रोकने के लिए सभी उपाय करने की हिदायत दी है. सफर ने दिल्लीवासियों को सेहत संबंधी परामर्श देते हुए कहा कि निवासी बचाव के लिए सामान्य मास्कों पर भरोसा नहीं करें. एजेंसी ने लोगों से घरों से निकलने से परहेज करने को कहा है.

मरीजों की संख्या बढ़ जाती है
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जिन महीनों में प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहता है, उस दौरान अस्पताल आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है. साथ में ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है, जिन्हें दिल का दौरा पड़ा होता है. उन्होंने एम्स में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा कि लोगों की सेहत पर प्रदूषण के प्रभाव का पता लगाने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं.