नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर किए एयरसेल मैक्सिस मामलों में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती को बृहस्पतिवार को अग्रिम जमानत दे दी. विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी ने चिंदबरम तथा उनके बेटे को राहत दे दी और उन्हें मामलों की जांच में शामिल होने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा, ‘‘गिरफ्तारी की सूरत में उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा किया जाए. आरोपियों को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया जाता है.’’ चिदंबरम 305 करोड़ रुपये के आईएनएक्स मीडिया मामले के साथ एयरसेल-मैक्सिस मामले में जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में हैं.

वहीं, इससे पहले आज ही आईएनएक्स मीडिया घोटाला मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को बड़ा झटका लगा. सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम को राहत नहीं देते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी. जस्टिस भानुमति और जस्टिस बोपन्ना की खंडपीठ ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की. ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा अब चिदंबरम को गिरफ्तार किया जा सकता है.

INX मीडिया घोटाला: चिदंबरम को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका की खारिज

आईएनएक्स मीडिया घोटाला मामले के तार अपनी बेटी की हत्या के आरोप में जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी से जुड़े हैं. इंद्राणी ने अपने बयान में दावा किया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम ने उनसे कहा था कि वे उनके बेटे कार्ति की उसके कारोबार में मदद करें और आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी के बदले विदेशों में भुगतान करें. आईएनएक्स मीडिया की स्थापना 2006 में पीटर मुखर्जी और उनकी पत्नी इंद्राणी द्वारा की गई थी. दोनों ने 13 मार्च 2007 को 304 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश प्रस्ताव को मंजूरी प्राप्त करने के लिए एक आवेदन किया था.

चिदंबरम ने 304 करोड़ विदेशी निवेश प्रस्ताव को मंजूरी को दी थी स्वीकृति
एफआईपीबी की अध्यक्षता आर्थिक मामलों के सचिव करते थे और इसमें अन्य स्थायी सदस्य थे, जिसमें औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), वाणिज्य, विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध और प्रवासी भारतीय मामलों के सचिव शामिल थे. कंपनी ने 4.62 करोड़ रुपए के एफडीआई का प्रस्ताव किया था. उसके इस प्रस्ताव को तत्कालीन वित्तमंत्री चिदंबरम की स्वीकृति के बाद एफआईपीबी ने मंजूरी दे दी थी. कंपनी ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए 800 रुपए प्रति शेयर के प्रीमियम के साथ 305 करोड़ रुपए एफडीआई के रूप में प्राप्त कर लिए थे.