
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Kerala Airport Story: आमतौर पर हवाई अड्डों का निर्माण सरकारी योजनाओं, भारी-भरकम बजट और नीतिगत मंजूरियों के जरिए होता है. लेकिन केरल में एक ऐसा एयरपोर्ट है जिसने सत्ता की शक्ति से नहीं, बल्कि सामूहिक विश्वास और साझा जिम्मेदारी की नींव पर आकार लिया.
यह कहानी है कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CIAL) की, जो आज दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है. हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी परियोजना के संघर्ष और सफलता को फिर से याद किया गया है.
90 के दशक की शुरुआत में केरल में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विचार ही अपने आप में बहुत साहसी था. उस दौर में यह सोचना कि बिना सीधे सरकारी वित्तपोषण के इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट खड़ा किया जा सकता है, लगभग नामुमकिन माना जाता था.
वीडियो के अनुसार, “90 के दशक में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाना सिर्फ महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि अकल्पनीय था.” बड़े प्रोजेक्ट्स तब या तो सरकार के नियंत्रण में होते थे या बड़े कॉरपोरेट घरानों के.
इस क्रांतिकारी विचार के केंद्र में थे वी.जे. कुरियन, जो उस समय एक आईएएस अधिकारी थे. कुरियन ने फाइलों के रुकने और फंड की कमी के आगे घुटने टेकने से इनकार कर दिया.
उन्होंने महसूस किया कि पारंपरिक सरकारी मॉडल यहां काम नहीं करेगा. उन्होंने एक ऐसा रास्ता चुना जो आज ‘पीपीपी मॉडल’ की पहचान है. उन्होंने केरल के आम लोगों और विदेशों में रहने वाले मलयाली प्रवासियों से अपील की कि वे इस परियोजना में भागीदार बनें.
कुरियन की अपील का जो असर हुआ, वह अभूतपूर्व था. दुनिया भर से लगभग 10,000 निवेशकों ने इस प्रोजेक्ट को अपना समर्थन दिया. इनमें साधारण किसान, छोटे उद्यमी और विदेशों में मेहनत करने वाले श्रमिक शामिल थे. यह भारत का पहला ऐसा हवाई अड्डा बना जो ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ के तहत जनता के पैसों से खड़ा हुआ.
धन जुटाने के बाद भी चुनौतियां कम नहीं थीं. नेदुम्बासेरी में चुनी गई जमीन एक दलदली इलाका थी, जिसे विकसित करना बेहद कठिन था. इसके अलावा पर्यावरण संबंधी चिंताएं, राजनीतिक विरोध और नौकरशाही की अड़चनें हर कदम पर बाधा बनीं.
जैसा कि वीडियो में बताया है, “अनुमति से लेकर राजनीति और फंडिंग तक हर चीज एक लड़ाई थी.” लेकिन 1999 में जब पहले विमान ने यहां से उड़ान भरी, तो वह केवल एक रनवे का उद्घाटन नहीं था, बल्कि केरल के आम नागरिक के आत्मविश्वास की जीत थी.
आज CIAL केवल अपनी बनावट के लिए नहीं, बल्कि अपनी सोच के लिए जाना जाता है. यह दुनिया का पहला पूर्णतः सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा है. यहां लगे 46,000 से अधिक सोलर पैनल न केवल हवाई अड्डे की जरूरत पूरी करते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली भी पैदा करते हैं.
वर्तमान में आईएएस अधिकारी ए.एस. सुहास के नेतृत्व में CIAL लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. कुछ हजार यात्रियों से शुरू हुआ यह सफर अब सालाना 10 मिलियन (1 करोड़) से अधिक यात्रियों तक पहुंच चुका है.
आज यह केरल को 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ता है और भारत के शीर्ष 10 सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शुमार है. CIAL इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि यदि विजन साफ हो और जनता का साथ मिले, तो दलदल से भी आसमान की उड़ान भरी जा सकती है.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.