नई दिल्ली: कोरोना वायरस के चलते 24 मार्च से लॉकडाउन से जूझ रहे देश के लिए केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए जैसे भारी-भरकम पैकेज की घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पैकेज को लेकर कहा कि ये पैकेज देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है और इसे उन्होंने आत्मनिर्भर पैकेज का नाम भी दिया. उद्योग, व्यापारियों, किसानों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और शिक्षा से जुड़े कई ऐलान किए. केंद्र सरकार ने इस पैकेज को बड़ा कदम बताया है. वहीं, विपक्ष ने इसे सिर्फ लोन मेला और योजनाओं का पिटारा बताया है. विपक्ष का कहना है कि लोगों को सीधे मदद की ज़रूरत थी, जो नहीं दी गई. जबकि केंद्र सरकार और निर्मला सीतारमण का कहना है कि ये पैकेज अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में बहुत मददगार साबित होगा. Also Read - भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा को आई बचपन की याद, दो चोटी बांधी और बोली- जो भी है....

इस 20 लाख करोड़ के पैकेज के तहत घोषणाएं करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार पांच दिन तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. 13 मई से लेकर 17 मई तक उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं की. हर प्रेस कॉन्फ्रेंस करीब एक-एक घंटे तक चली. आइये जानते हैं इस पैकेज में किसे क्या मिला. Also Read - लॉकडाउन में इस बात से बहुत परेशान हो गए अमिताभ बच्चन, फैंस से मांगी माफी

13 मई: पहली प्रेस कॉन्फ्रेस, MSME के लिए कई घोषणाएं
– 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज में से 6 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा.
– MSME (Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises) सेक्टर को 3 लाख करोड़ का बिना गारंटी लोन दिया जाएगा. यह लोन 4 साल के लिए बिना गारंटी दिया जाएगा. MSME सेक्टर के लिए 50 हजार करोड़ इक्विटी इंफ्यूज होगी. संकट में फंसे MSME के लिए 20 हजार करोड़ का पैकेज दिया गया.
– 25 लाख की मैनुफैक्चरिंग यूनिट पहले माइक्रो की श्रेणी में आते थे, लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया है. अब 1 करोड़ तक के निवेश वाले उद्योग भी माइक्रो श्रेणी में ही आएंगे.
– स्माल इंडस्ट्री में 10 करोड़ का निवेश और 50 करोड़ का टर्नओवर आएगा. वहीं मीडियम इंडस्ट्री में 20 करोड़ का निवेश और 100 करोड़ का टर्नओवर आएगा.
– EPF: भारत सरकार ईपीएफओ में तीन माह तक योगदान देगी. वहीं पीएफ में अंशदान 12 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है. हालांकि केंद्र और पब्लिक सेक्टर में यह अंशदान 12 फीसदी ही रहेगा. प्राइवेट सेक्टर में ईपीएफओ में अंशदान घटाया दिया गया है. टेक होम सैलरी में वृद्धि की गई है. इससे 72 लाख 22 हजार कर्मचारियों को फायदा. यह नियम सिर्फ तीन महीने के लिए लागू की गई है. साथ ही सैलरी का 24 फ़ीसदी पीएफ सरकार जमा करेगी. Also Read - Covid-19 in West Bengal: कोरोना ने 6 और लोगों की ली जान, मरने वालों की संख्या 217 हुई, 4 हजार से ज्यादा संक्रमित

– बिजली वितरण कंपनियों के लिए 90 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है. कॉन्ट्रैक्टर्स को काम में छह माह का एक्सटेंशन दिया जाएगा. साथ ही काम खत्म करने की मियाद में भी रियायत दी जाएगी.
– रियल स्टेट: कोरोना वायरस को एक्ट ऑफ गॉड की श्रेणी में रखा जाएगा. इस कारण रजिस्ट्रेशन और निर्माण कार्य पूरा करने के तारीख को बढ़ाई जा सकती है. फिलहाल के लिए 6 महीने तक इनके कार्यों को आगे बढ़ा दिया जाए. 25 मार्च के बाद अगले 6 महीने तक की अवधि को बढ़ा दिया जाएगा. इससे डेवलपर्स को फायदा होगा.

– टैक्स कटौती: टीडीएस और टीसीएस को 25 फीसदी घटाया जाएगा. यह अगले साल मार्च तक लागू रहेगा. इनकम टैक्स रिटर्न्स को 31 जुलाई 2020 और 31 अक्टूबर 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 तक किया जाएगा. टैक्स एसेसमेंट की समय सीमा को 3 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दी गई है.
– 15 हज़ार से कम सैलरी वालों को सरकारी सहायता दी जाएगी. ऐसे लोग पीएफ से अपना पैसा ले सकते हैं, ताकि उनके हाथ में रुपए रहेंगे.

14 मई: प्रेस कॉन्फ्रेस का दूसरा दिन, मजदूरों के लिए कई ऐलान
– न्यूनतम वेतन का लाभ तीस प्रतिशत वर्कर ही उठा पाते हैं. कम से कम न्यूनतम वेतन होना चाहिए. इसलिए दिहाड़ी 182 रुपए से बढ़ाकर 202 रुपए किए गए. सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र मिलेंगे.
– हर साल मजदूरों के स्वास्थ्य का चेक अप होगा. श्रमिक एजेंटों के जरिए नहीं रखे जाएंगे.
– महिलाओं के लिए काम के क्षेत्र खुले हैं. वह अगर रात में भी काम करती हैं तो उनके लिए अलग व्यवस्था होगी.
– अगले दो महीने के लिए मजदूरों को फ्री राशन दिया जाएगा. जिनके पास कार्ड नहीं हैं, उन्हें भी राशन दिया जाएगा. पांच-पांच किलो गेंहू, चावल, और चना दिया जाएगा.
– 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को इसका फायदा मिलेगा.
– इसके लिए 3500 करोड़ का इंतज़ाम किया जा रहा है.
– एक देश एक राशन कार्ड, हर शहर में एक राशन कार्ड चलेगा

15 मई: कृषि क्षेत्र के लिए तीसरे दिन किए गए ये ऐलान
– अब देश के सभी पशुओं का टीकाकरण होगा. खुरपका-मुंहपका जैसे रोगों के लिए 13,343 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया गया. पशु पालन को बढ़ाने के उद्देश्य से (भैंस, भेड़, बकरी और सुअर) 100% टीकाकरण के लिए 13,343 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ ‘राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ की शुरूआत की गई.
– हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए 4000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. अगले 2 वर्षों में 10,00,000 हेक्टेयर जमीन को कवर किया जाएगा.
– 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष स्थापित किया जाएगा.
– डेयरी प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने और कैटल फीड प्रोडक्शन में निर्यात के लिए 15,000 करोड़ रुपए का फंड अलग से निर्धारित किया गया है.
– सरकार ने समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन (मछली पालन) के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपए की ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ शुरू करेगी. इस कार्यक्रम से 55 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है.
– मछुआरों को नई नावें-नौकाएं दी जाएंगीं.
– मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इससे 2 लाख मधुमक्खी पालनकर्ताओं की आय में वृद्धि होगी.
– एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्रों, संग्रह, विपणन और भंडारण केंद्रों और मूल्य संवर्धन सुविधाओं से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये की योजना लागू की जाएगी.
– ऑपरेशन ग्रीन्स के तहत अगर टमाटर, प्याज और आलू सहित सब्जी और फल को खेतों से बाज़ार तक खराब होने से बचाने को अगले 6 महीने के लिए ‘ऑपरेशन ग्रीन’ पायलट प्रोजेक्ट को बढ़ा दिया गया है.
– जिंस एक्ट 1955 में बदलाव होगा. अभी इसके तहत नियम ये है कि अंतरराज्यीय व्यापार पर रोक है. इसमें बदलाव होने पर किसान दूसरे राज्य में अनाज बेच सकेंगे. अभी किसान सिर्फ लाइसेंसी व्यापारी को ही अनाज बेच सकता है, लेकिन बदलाव के बाद वह किसी को भी फसल बेच सकेगा, जिससे उन्हें मनचाही कीमत मिल सकती है. इस कानून के तहत आलू, प्याज, तिलहन आदि आते हैं.

16 मई: चौथे दिन हुईं ये घोषणाएं
– देश के 6 एयरपोर्ट नीलाम किये जाएंगे. इन एयरपोर्ट्स का विकास पीपीपी मॉडल से कराया जाएगा.
– एयरपोर्ट की नीलामी का काम अथॉरिटी ऑफ इंडिया करेगी.
– ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकी ताकि भारतीय विमानों को लम्बे रास्ते न लेना पड़े. ये चीज़ें दो महीने के अन्दर किया जाएगा.

देश में ही हथियार बनाने पर जोर
– देश में ही हथियार बनाने पर जोर दिया गया है. कई ऐसे हथियार और पार्ट्स हैं जो विदेश से मंगाए जाते हैं, वो देश में ही बनाए जाएंगे. ऑर्डिनंस फैक्ट्री का कॉर्पोरेटाइजेशन होगा. प्राइवेटाइजेशन नहीं होगा. रक्षा उत्पादन में FDI की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत की गई है.

500 माइनिंग ब्लॉक की नीलामी की जाएगी
– कोल इंडिया लिमिटेड की खदाने भी प्राइवेट सेक्टर को दी जाएंगी.
– 50 ऐसे नए ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे. पात्रता की बड़ी शर्तें नहीं रहेंगी.
– कोयला क्षेत्र में कमर्शियल माइनिंग होगी और सरकार का एकाधिकार खत्म होगा.
– कोयले को खदान से जरूरत की जगह तक ले जाने का बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए 50,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं.
– 50,000 करोड़ रुपये का निवेश CIL (कोल इंडिया लिमिटेड) द्वारा 2023-24 तक कोयले के उत्पादन को 1 बिलियन टन तक पहुंचाने और निजी ब्लॉकों द्वारा कोयला उत्पादन के लिए किया गया है.

17 मई: शिक्षा और अन्य क्षेत्र के लिए ये हुए ऐलान
– पांचवीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा और कुछ अन्य क्षेत्र के लिए कई ऐलान किए गए. इनमें से अहम् ये भी है कि मनरेगा के लिए अलग से 40 हज़ार करोड़ का प्रावधान किया गया है. ताकि मजदूरों को काम मिल सके.
– 100 यूनिवर्सिटी को ऑनलाइन कोर्स की अनुमति दी गई है. दिव्यांग छात्रों के लिए अलग से कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं. हर क्लास के लिए अलग टीवी चैनल होगा
– किसी भी कंपनी पर एक साल तक डिफ़ॉल्ट घोषित करने या दिवालियापन की कार्रवाई नहीं की जाएगी
– स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार अब ज्यादा खर्च करेगी. हर जिले में संक्रामक रोग सेंटर बनाया जाएगा. शहरों के साथ ही गांव इलाकों में भी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी स्थापित किया जाएगा.
– इसके साथ ही किसी महामारी से निपटने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य लैब भी बनाई जाएगी.