नई दिल्लीः अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लखनऊ में अहम बैठक बुलाई थी. इस बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में वर्किंग कमेटी की तरफ से कहा गया कि ज्यादातर सदस्य पुनर्विचार याचिका दायर करने के पक्ष में है. जफरयाब जिलानी और ओवैसी ने रिव्यू फाइल करने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने के प्रस्ताव को खारिज करने की भी बात कही है. बोर्ड ने 30 दिन के अंदर रिव्यू पिटिशन दायर करने की बात कही है.

जफरयाब जिलानी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट द्वारा 9 नवंबर को दिए गए फैसले के खिला पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. जिलानी ने कहा कि हमारी शरीयत के अनुसार मस्जिद किसी दूसरी जमीन में नहीं बनाई जा सकती इस लिए हम दूसरी जगह जमीन स्वीकार नहीं करेंगे. बोर्ड ने एएसआई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में भी यह साबित नहीं हो सका है कि किसी मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था. उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे फैसले हैं जो हमारी समझ से परे हैं.

संवाददाता सम्मेलन में जिलानी ने कहा कि आज कि इस बैठक में कुल 45 लोगों ने भाग लिया और इसके ज्यादातर लोग पुनर्विचार दायर करने के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा कि मस्जिद से हम समझौता नहीं कर सकते और न ही इसके बदले में कुछ और ले सकते हैं, फिर चाहे वो जमीन ही क्यूं न हों.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में हैदराबाद सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख के सांसद असदुद्दीन ओवैसी, मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद, आरिफ अकील, एआईएमपीएलबी बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना जलालुद्दीन उमरी, सदस्य आसमां ज़हरा, उमरैन महफूज़, महासचिव वली रहमानी, राबे हसन समेत कई बड़े मुस्लिम धर्मगुरू और नेता मौजूद थे.