नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने 10-49 बिस्तर की क्षमता वाले सभी छोटे एवं मध्यम मल्टीस्पेशलिटी नर्सिंग होम को शनिवार को ‘कोविड-19 नर्सिंग होम’ घोषित कर दिया. आधिकारिक बयान के मुताबिक, कोरोना वायरस के मरीजों के लिए बिस्तरों की संख्या में वृद्धि करने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है. Also Read - यूपी के विश्वविद्यालयों में जल्द शुरू की जाएगी ऑनलाइन क्लास, जानें एडमिशन और परीक्षाओं की पूरी जानकारी

आदेश के मुताबिक, केवल विशेष तौर पर आंख, कान एवं गले का इलाज करने वाले केंद्रों, डायलिसिस केंद्रों, प्रसव गृहों और आईवीएफ केंद्रों को इससे छूट दी गई है. Also Read - पर्यटकों के लिए खुशखबरी, इस दिन से देख सकेंगे जम्मू-कश्मीर की हसीन वादियां, दिशानिर्देश जारी

नए आदेश में इसमें कहा गया, ‘छोटे और मध्यम मल्टीस्पेशलिटी नर्सिंग होम (10 से 49 बिस्तर वाले) में कोविड और गैर-कोविड मरीजों के परस्पर एक-दूसरे के सपंर्क में आने से बचने के लिए और कोविड-19 के मरीजों के लिए बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ऐसे सभी नर्सिंग होम को कोविड-19 नर्सिंग होम घोषित किया गया है, जिनकी
बिस्तर क्षमता 10-49.’ Also Read - डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने LNJP अस्पताल का किया दौरा, कोरोना उपचार का लिया जायजा

आदेश के मुताबिक, ऐसे सभी नर्सिंग होम को आदेश जारी होने के तीन दिन के अंदर अपने कोविड बिस्तरों को तैयार रखना चाहिए, ऐसा करने में विफल रहने वालों को दिल्ली नर्सिंग होम पंजीकरण के नियमों के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा.

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अस्पताल शुल्क, जांच शुल्क की सीमा तय करेगा
कोविड-19 के उपचार एवं जांच के लिए अत्यधिक शुल्क वसूलने की शिकायतों के बीच दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण 16 जून को एक बैठक में निजी अस्पतालों तथा एम्बुलेंस शुल्क की सीमा तय करने तथा कोविड-19 की जांच दर घटाने के बारे में चर्चा करेगा. बैठक में उपराज्यपाल अनिल बैजल तथा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अलावा राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त तथा अन्य शीर्ष अधिकारी भी शामिल होंगे. इसमें अधिकारी बड़े अस्थायी अस्पताल बनाने के बारे में भी
चर्चा करेंगे.