All-Party Meet On Ladakh Clash: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुक्रवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक समाप्त हो गई. इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भाग लिया. सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरूआती संबोधन किया. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर विपक्ष का सहयोग मांगा. राजनाथ सिंह ने गवलान घाटी में हुई झड़प पर भी विपक्ष के नेताओं को अपने स्तर से जानकारी दी. Also Read - हार्दिक पटेल अब गुजरात कांग्रेस की संभालेंगे कमान, बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शाम पांच बजे से बुलाई गई इस बैठक में कुल 20 राजनीतिक दलों ने भाग लिया. मीटिंग में पांच सांसद वाले दलों को ही आमंत्रित किया गया था. यही वजह है कि आम आदमी पार्टी, राजद, एआईएमआईएम जैसे कई दलों को पीएमओ ने इस मीटिंग में आमंत्रित नहीं किया, जिससे इन दलों ने सार्वजिक रूप से नाराजगी भी जताई है. Also Read - सोनिया गांधी की कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों के साथ बैठक, राहुल को फिर से अध्यक्ष बनाने की उठी मांग

बैठक में भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, द्रमुक, टीआरएस, जद (यू), बीजद, लोजपा, बसपा, शिवसेना और राकांपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्ष ने भाग लिया. कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकार से कहा है कि सीमा पर स्थिति के बारे में उसे पारदर्शी होना चाहिए. विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना भी की है. मोदी ने जोर दिया है कि भारतीय सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हमारे सैनिकों ने कर्तव्य के प्रति अनुकरणीय साहस और वीरता दिखाई और भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं को निभाते हुए अपने जीवन का बलिदान किया.

जानिए किस पार्टी ने क्या कहा?

भारत-चीन सीमा मुद्दों पर पीएम के साथ सर्वदलीय बैठक में एनसीपी प्रमुख और पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार ने कहा कि सैनिकों ने हथियार उठाए या नहीं इसका फैसला अंतरराष्ट्रीय समझौतों से होता है और हमें ऐसे संवेदनशील मामलों का सम्मान करने की जरूरत है.

सभी पार्टी की बैठक में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के प्रमुख और सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि “हमें पीएम पर पूरा भरोसा है. अतीत में भी, जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात होती है, तो पीएम ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं.”

वहीं टीआरएस चीफ और तेलंगाना सीएम केसीआर ने कहा कि कश्मीर पर पीएम की स्पष्टता ने चीन को नाराज कर दिया है. कश्मीर के विकास पर पीएम ने जोर दिया है जिससे चीन नाराज है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पीएम के आत्मानिर्भर भारत के आह्वान ने चीन को झकझोर दिया है.

बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा ने अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा, “हम पूरी तरह से और बिना शर्त सरकार के साथ खड़े हैं”.

डीएमके के एमके स्टालिन ने कहा कि “जब हम देशभक्ति की बात करते हैं तो हम एकजुट होते हैं.” उन्होंने चीन के मुद्दे पर पीएम के हालिया बयानों का भी स्वागत किया.

एनपीपी के कोनराड संगमा ने कहा, “सीमा के साथ बुनियादी ढांचा का काम नहीं रुकना चाहिए. म्यांमार और बांग्लादेश में चीन प्रायोजित गतिविधियां चिंताजनक हैं. पीएम नॉर्थ ईस्ट इंफ्रा पर काम कर रहे हैं और यह जारी रहना चाहिए.”

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लद्दाख में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद पैदा हुए हालात में देश के रक्षा बलों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि सरकार यह आश्वासन दे कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति बहाल होगी और चीनी सैनिक अपनी पुरानी जगह पर लौटेंगे. उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई सर्वदलीय बैठक में यह भी कहा कि सरकार इस पूरे मामले में विपक्षी दलों और जनता को विश्वास में ले तथा स्थिति के बारे में नियमित तौर पर अवगत कराती रहे.

सरकार आश्वासन दे कि लद्दाख में यथास्थिति बहाल होगी और चीनी सैनिक पुरानी जगह पर लौटेंगे: सोनिया

सोनिया ने शहीद जवानों को नमन और घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए यह सवाल भी किया कि चीनी सैनिकों की घुसपैठ कब हुई थी और इसमें क्या कोई खुफिया नाकामी है? उनके मुताबिक यह बैठक उसी वक्त ही होनी चाहिए थी जब सरकार के पास कथित तौर पर यह जानकारी आई थी कि चीनी सैनिकों ने पांच मई को घुसपैठ की. हमेशा की तरफ पूरा देश चट्टान की माफिक एकजुट खड़ा होता और देश की अखंडता की रक्षा करने में सरकार का पूरा सहयोग करता.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘आज की स्थिति में भी हम इस संकट के कई महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में अनभिज्ञ हैं. ऐसे में हम सरकार से सवाल करना चाहते हैं कि किस तारीख को चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की? सरकार को इस बारे में कब जानकारी मिली? क्या यह पांच मई को हुआ था जैसा कि कुछ खबरों में कहा गया है या फिर इससे पहले?’’

उन्होंने यह सवाल भी किया, ‘‘ क्या सरकार को हमारी सीमाओं की उपग्रह से ली गई तस्वीरें नियमित तौर पर नहीं मिलती है? क्या हमारी बाह्य खुफिया एजेंसियों ने एलएसी पर किसी की असामान्य गतिविधि और बड़े पैमाने पर सैनिकों के जमावड़े के बारे में रिपोर्ट नहीं दी? क्या सरकार के मुताबिक कोई खुफिया नाकामी थी?

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी का मानना है कि पांच मई से लेकर छह जून को कोर कमांडर स्तर की बैठक होने के बीच कीमती वक्त को जाया किया गया. छह जून की बैठक के बाद भी सीधे चीन के नेतृत्व के साथ राजनीतिक एवं कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का प्रयास होना चाहिए था.’’ सोनिया ने दावा किया, ‘‘ हम सभी उपायों का इस्तेमाल करने में विफल रहे और इसका नतीजा यह हुआ है कि हमारे 20 जवानों की जान चली गई और कई घायल हो गए.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करती हूं कि हमारे साथ सारे तथ्य और अप्रैल के बाद से हुए घटनाक्रमों के बारे में जानकारी साझा करें. पूरा देश यह आश्वासन चाहता है कि यथास्थिति बहाल होगी और चीन एलएससी पर अपनी पुरानी जगह वापस जाएगा.’’ सोनिया ने आग्रह किया, ‘‘ हम यह भी चाहते हैं कि किसी भी खतरे से निपटने में हमारे रक्षा बलों की तैयारी के बारे में अवगत कराया जाए. विशेष तौर पर मैं पूछना चाहती हूं कि हमारी ‘माउंटेन स्ट्राइक कोर’ की क्या स्थिति है जिसकी अनुशंसा 2013 में की गई थी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ कांग्रेस और पूरा विपक्ष अपने रक्षा बलों के साथ खड़ा है और उनकी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए कोई भी त्याग करने को तैयार है. पूरा देश उम्मीद करता है कि सरकार संपूर्ण विपक्ष और पूरे देश को विश्वास में लेगी और हमें नियमित तौर पर स्थिति के बारे में अवगत कराती रहेगी.’’