नई दिल्ली. ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के मुद्दे पर पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का कई विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया. वहीं राजग में शामिल अधिकतर दलों ने इस मुद्दे पर सहमति दिखाई. बैठक के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भाकपा और माकपा को छोड़कर बैठक में उपस्थित सभी दलों ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की योजना को अपना समर्थन दिया. इस बीच, निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने कहा है कि भले ही अधिकतर राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपना समर्थन दे रहे हों, लेकिन फिलहाल इस योजना को अमल में ला पाना संभव नहीं है.

पीएम मोदी ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की योजना के संबंध में विभिन्न मुद्दों पर विचार करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लगभग साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद मीडिया से कहा, “बैठक में पांच प्रमुख एजेंडों पर चर्चा हुई, जिसमें ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ शामिल था.” उन्होंने कहा कि सिर्फ भाकपा और माकपा को छोड़कर बैठक में उपस्थित सभी विपक्षी पार्टियों ने इस विचार का समर्थन किया. रक्षामंत्री ने कहा, “सिर्फ भाकपा और माकपा ने अलग राय जाहिर की. दोनों ने कहा कि इसे लागू कैसे किया जा सकता है.” सिंह ने कहा कि 40 से अधिक पार्टियों को बैठक में आमंत्रित किया गया था, जिसमें से 21 पार्टियों के अध्यक्षों ने हिस्सा लिया. तीन ने कुछ कारणों से बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई.

कांग्रेस समेत कुछ राजनीतिक पार्टियों ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया. कांग्रेस ने बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर कहा कि अगर सरकार चुनाव सुधारों को लेकर कोई कदम उठानी चाहती है, तो वह संसद में इस विषय पर चर्चा कराए. कांग्रेस के अलावा विपक्ष के प्रमुख नेताओं में बसपा अध्यक्ष मायावती, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने हिस्सा नहीं लिया. कांग्रेस ने गुजरात में दो सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा उपचुनाव को अलग-अलग कराए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह भाजपा का दोहरा मापदंड है. पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्ष की बातों को दरकिनार करते हैं.

राजनाथ सिंह ने कहा, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर समिति बनाएंगे पीएम, अन्‍य दलों का ऐसा है रुख

इधर, निर्वाचन आयोग ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की योजना को तत्काल लागू करने को लेकर असमर्थता जताई है. एक पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने भी कहा कि यह प्रस्ताव जितना उचित है, उतना ही अनुचित भी है. निर्वाचन आयोग के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि यदि यह विचार संभव होता तो आयोग ने इस साल लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराए होते. निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव सात चरणों में कराए थे, जो 11 अप्रैल से शुरू हुआ था और 19 मई तक चला था. चुनाव परिणाम 23 मई को घोषित हुए थे. सूत्रों ने यह भी कहा कि एकसाथ चुनाव कराने में कानून-व्यवस्था का मुद्दा बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की संख्या सीमित है. उन्होंने यह भी कहा कि देश में 90 करोड़ से अधिक मतदाता हैं और एकसाथ चुनाव की तैयारी करना फिलहाल काफी कठिन काम है.

(इनपुट – एजेंसी)