नई दिल्ली। हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) पाकिस्तान में बंद कुलभूषण जाधव मामले में आज (गुरुवार) दोपहर 3.30 बजे अपना फैसला सुनाएगा. भारत और पाकिस्तान के अलावा दुनियाभर की नजरें इस मामले पर बनी हुई हैं. आइए जानते हैं इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ..

1. पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने 10 अप्रैल को एक बयान जारी कर कहा था कि मिलिट्री कोर्ट ने जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव को दोषी पाया है और उसे फांसी की सजा दी गई है. पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने कुलभूषण जाधव को सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि की थी.

2. पाकिस्तान का कहना था कि जाधव को मार्च 2016 में बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था. पाक का दावा था कि कुलभूषण जाधव भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट था.

3. भारत ने जवाब में पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि अगर पाक कुलभूषण को फांसी देता है तो भारत इसे पूर्व नियोजित मर्डर के तौर पर देखेगा. मामले में ‘हास्यास्पद’ ट्रायल चलता देख भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि जाधव को रिहा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे.

4. भारत ने पाक द्वारा जाधव को रॉ एजेंट बताए जाने पर जवाब देते हुए कहा कि कुलभूषण पूर्व नेवी ऑफिसर थे, जो बाद में बिजनेसमैन बन गए. जाधव जब एक बिजनेस ट्रिप के लिए ईरान गए थे, तब उनका अपहरण कर लिया गया और बाद में बलूचिस्तान ले जाया गया.

5. जाधव को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद, भारत में इस्लामाबाद के राजदूत अब्दुल बासित समेत अन्य पाकिस्तान अधिकारियों ने कहा था कि जाधव को कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत सजा सुनाई गई है और उसे पूरा अधिकार है कि वो अपनी सजा के खिलाफ अपील करे और दया की मांग करे.

6. इस बीच भारत ने फिर से जाधव के लिए राजनयिक मदद मुहैया कराने की मांग की. 26 अप्रैल को पाकिस्तान ने भारत की राजनयिक मदद मुहैया कराने कराने के आग्रह को 16वीं बार ठुकरा दिया. जाधव की गिरफ्तारी के बाद से ही भारत पाकिस्तान से राजनयिक मदद मुहैया कराने की मांग कर रहा है. हालांकि, पाकिस्तान ने हर बार यह कहकर मांग ठुकरा दी कि जाधव पर जासूसी का आरोप है और इसलिए हम राजनयिक मदद नहीं कर सकते.

7. अंत में भारत ने 8 मई को आईसीजे का रुख किया और पाक पर आरोप लगाया कि उसने जाधव की गिरफ्तारी और ट्रायल में कूटनीतिक नियमों का पालन नहीं किया. ये 18 सालों में पहली बार है जब भारत और पाकिस्तान ने किसी मामले को लेकर आईसीजे का दरवाजा खटखटाया है. इससे पहले वर्ष 1971 में भारत ने पाक को आईसीजे में ले गया था.

8. भारत की याचिका पर सुनवाई करते हुए आईसीजे के प्रेसिडेंट रॉनी अब्राहम ने पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को लिखकर कहा कि जब तक आईसीजे इस मामले की सुनवाई नहीं कर लेता है, जाधव की फांसी रोक दी जाए. 15 मई को नीदरलैंड्स के द हेग में सुनवाई हुई थी.

9. भारत की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने पक्ष रखा था. साल्वे ने कहा कि पाक की मिलिट्री अदालत ने ट्रायल के दौरान अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया. इसलिए जाधव को सुनाई गई फांसी की सजा को रद्द किया जाना चाहिए. भारत ने पाक की इस बात के लिए भी आलोचना की थी कि उसने जाधव के खिलाफ सबूतों को सार्वजनिक नहीं किया था.

10. पाकिस्तान की तरफ से वकील खवर कुरैशी ने देश का स्टैंड रखा. कुरैशी का कहना था कि विएना संधि हम पर लागू नहीं होती क्योंकि जाधव पर जासूसी का आरोप लगा है. पाक ने भारत पर आरोप लगाया कि उसने फैसले को प्रभावित करने के लिए आईसीजे का राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल किया.