नई दिल्ली. जानलेवा निपाह वायरस (NiV) ने उत्तरी केरल के काझीकोड में कोहराम मचा रखा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर डरे हुए हैं. राज्य में अलर्ट जारी कर दिया गया है और केंद्र सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है. Also Read - सेक्स के दौरान वजाइना से आती है सड़ी ब्रेड और मछली जैसी बदबू , तो क्या करें??

बता दें कि निपाह वायरस का प्रभाव सबसे पहले साल 2001 में भारत में देखने को मिला था. इसके छह साल बाद इसकी फिर से 50 मौतों के पीछे इसे ही कारण बताया गया था. दोनों ही बार इसका प्रभाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिला था. दुनिया में सबसे पहले साल 1998 में मलेशिया में निपाह वायरस का असर देखने को मिला था. इसके बाद साल 2004 में चमगादड़ के प्रभाव से फैले इस वायरस ने पश्चिम बंगाल में काफी लोग प्रभावित हुए थे. Also Read - न हों भ्रमित, सेक्स करने से नहीं फैलता कोरोना वायरस, लेकिन...

निपाह वायरस के बारे में 10 चीजों को जानना जरूरी है… Also Read - Twitter के CEO जैक डोर्से ने किया अपने डायट प्लान का किया खुलासा, सप्ताह में सिर्फ इतने बार खाना खाते हैं खाना

1. इसकी चपेट में आने से 75 से 100 फीसदी तक मौत होने की आशंका है.

2. निपाह वायरस दिमाग पर असर डालता है. इससे प्रभावित इंसान को बुखार, कमजोरी और सुस्ती होती है.

3. निपाह वायरस जूनोटिक बीमारी का उदाहरण है. इसमें जानवरों की बीमारी इंसानी शरीर में चली जाती है. जूनोटिक बीमारी में यदि जानवरों को पर्याप्त एंटीबायोटिक दिया गया हो तो इसका प्रभाव कम हो जाता है.

4. निपाह वायरस में इंसान से इंसान में भी वायरस जाने की संभावना होती है. हालांकि, इसमें अभी भी शोध जारी है.

5. निपाह वायरस अपना तरीका बदलता रहता है.वह बिल्कुल H1N1 वायरस की तरह होता है. यदि आप स्वाइन फ्लू या इंफ्लूएंजा टीका इसी साल लिया है, तो इसका मतलब है कि वह इस टीके के प्रभाव के कम होने पर अपनी चपेट में ले ले. इसी की वजह से इसे जानलेवा माना जाता है.

6. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत और ऑस्ट्रेलिया में निपाह वायरस के फैलने की चेतावनी दी है. यह बीमारी लाइलाज है.

7. निपाह बीमारी लाइलाज होती है. संक्रमण के बाद बीमारी को बढ़ने से नहीं रोका गया तो 24 से 48 घंटे में मरीज कोमा में चला जाता है. इसके बाद उसकी मौत हो सकती है.

8. फल और सब्जी पर जीविका चलाने वाले सूअर और चमगादड़ से ये वायरस तेजी से फैलता है.

9. संक्रमित इलाके में 2 हफ्ते के भीतर जाने से आप पर भी उसका प्रभाव पड़ सकता है. केरल में एक नर्स की ऐसे ही मौत हो गई है.

10. चमगादड़ द्वारा जूठा करके छोड़े गए फलों को खाने से भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. ऐसे में फलों पर ध्यान रखें कि वह कहीं से किसी जानवर का जूठा तो नहीं किया गया है.

वायरस से बचने के लिए अपनाएं ये 5 तरीका

1. जमीन पर गिरे फलों को खाने से बचें. हो सकता है इन फलों को चमगादड़ ने जूठा किया हो, जिससे फल के द्वारा यह वायरस आपको प्रभावित कर दे.

2. इस बीमारी का अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है.

3. पाम के पेड़ के पास खुले कंटनेर में बनी टोडी शराब पीने से बचें.

4. बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति की चपेट में न आएं. ॉ

5. टॉयलेट में इस्तेमाल होने वाली चीजें बाल्टी और मग को साफ रखें.