वियतनाम यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जी-20 देशों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन के हांगझोउ शहर रवाना हो गए। इस बार प्रधानमंत्री की यह विदेश यात्रा कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे हैं। वैसे तो प्रधानमंत्री जी-20 समिट में शामिल होने के लिए चीन गए हैं लेकिन यह मौका इन तमाम मुद्दों को साधने का है जिससे यह यात्रा महत्वपूर्ण हो जाती है। आइए हम आपको बताते हैं कि क्या हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के मायने…

• जी-20 देशों की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी कई राष्ट्राध्यक्षों से मिलेंगे।
• रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। उनसे एकबार फिर एनएसजी मुद्दे पर बात की जा सकती है। चीन ने ही भारत की एनएसजी सदस्यता पर रोड़ा लगा दिया था।

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• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह चीन यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस यात्रा से पहले मोदी जी वियतनाम में थे और चीनी राष्ट्रपति से मिलने के बाद वो अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करेंगे। वियतनाम और अमेरिका दोनों से चीन के रिश्ते ठीक नहीं है। इससे चीन को एक सख्त संदेश जाएगा।
• जी-20 में भारत आतंकवाद, फाइनेंसिंग और कर चोरी या कारा धान जैसे मुद्दे उठा सकता है। इन समस्याओं से कमोबेश सभी देश जूझ रहे हैं। भारत इनके हल तलाशने की कोशिश करेगा।
• चीन में होने जा रही जी-20 देशों के समिट में कर सुधार, पर्यावरण परिवर्तन और मेडिकल क्षेत्र के कई मुद्दों पर बात किए जाने की संभावना है।
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन के बारे में किए गए ट्वीट में कहा, ‘आज जो भी मुद्दे हमारे समक्ष हैं भारत उन सभी में रचनात्मक भूमिका निभायेगा और उसके निदान की दिशा में काम करेगा। भारत तीव्र, समावेशी और सतत अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति कायम करने के एजेंडे को आगे बढ़ायेगा। एक ऐसा आर्थिक परिवेश जो कि दुनियाभर में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति विशेष तौर पर विकासशील देशों में जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, के जीवन को बेहतर बनाने में मददगार होगा।’

क्या है जी-20 ?
ग्रुप ऑफ ट्वेंटी (जी-20) वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए विश्व की प्रमुख विकसित तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एकसाथ लाने का मंच है। जी-20 के नेता वर्ष में एक बार तथा जी-20 के वित्तमंत्री तथा केंद्रीय बैंकों के गवर्नर्स वर्ष में कई बार बैठकें करते हैंजी-20 की शुरुआत 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के पश्चात वित्तमंत्रियों तथा केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक से हुई थी। इसकी स्थापना प्रमुख आर्थिक एवं वित्तीय नीतिगत मुद्दों पर अधिक विस्तृत चर्चा तथा सभी के फायदे के लिए स्थिर एवं संधारणीय वैश्विक आर्थिक विकास प्राप्त करने हेतु सहयोग सुनिश्चित करने के लिए हुई थी।