यूपी और उत्तराखंड के सीएम रहे एनडी तिवारी का गुरुवार को निधन हो गया. इसे अंकों का एक संयोग ही कहा जाएगा कि जिस तारीख को उन्होंने दुनिया में पहली सांस ली थी, उसी तारीख को अंतिम सांस भी ली. नंबर में आ गए तो ये भी जान लें कि वह देश के एक मात्र नेता रहे हैं, जो दो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. लेकिन, 90 के दशक या फिर उसके बाद पैदा लिए लोगों के चेहरे पर एनडी तिवारी का नाम लेते ही एक अलग मुस्कान देखने को मिलती है. वे थोड़ा चटखारे लेते हैं और थोड़ा भावभंगिमा बनाते हुए उनके चारित्रिक पहलू पर आ जाते हैं. Also Read - दिल्‍ली के सभी बॉर्डर सील, पुलिस कर रही सख्‍त चेकिंग, सिर्फ जरूरी सेवाओं को ही है छूट

पहले जानते हैं कि 90 के दशक और उसके बाद के युवा क्या जानते हैं
एनडी तिवारी का नाम आते ही सबसे पहले जो नाम दिमाग में आता है तो वह रोहित शेखर का. रोहित और एनडी तिवारी में लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली, जिसके बाद एनडी तिवारी ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि रोहित उनके बेटे हैं. अपने जमाने के तेज-तर्रार नेता रहे शेर सिंह की बेटी उज्ज्वला शर्मा और एनडी तिवारी के रिश्ते पर मुहर लग गई. इसके बाद से ये कहा जाने लगा कि रोहित पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने खुद को नाजायज साबित करने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. इस लड़ाई की हर परत मीडिया की सुर्खियों में रही और 90 बॉर्न युवा उसे पढ़-सुन एक धारणा बनाते रहे. Also Read - Noida: गार्मेंट कंपनी में लगी भीषण आग, एक दर्जन दमकल गाड़ियों को घंटों करनी पड़ी मशक्कत

इसी दौर में एनडी तिवारी का नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया. उन दिनों वह आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे. एक टीवी चैनल में उनकी एक कथित सेक्स सीडी सामने आई, जिससे उनकी नई तस्वीर तो सामने आई ही राजनीतिक भूचाल भी आ गया. इसमें कथित तौर पर एनडी तिवारी तीन महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थे. इसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि, तिवारी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था. Also Read - 12 साल की बच्‍ची ने बचत के पैसों से प्रवासी मजदूरों को फ्लाइट से झारखंड भेजने का किया इंतजाम

क्या विकास पुरुष हैं एनडी तिवारी?
एनडी तिवारी नेहरू-गांधी परंपरा के ऐसे नेता रहे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में भी सक्रिय भूमिका निभाई. धोती वाले ब्राह्मण के तौर पर लोगों के बीच मशहूर तिवारी एक समय वीपी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी सरीखे नेताओं की लिस्ट में माने जाते रहे. इतना ही नहीं अपने दौर में उन्हें विकास पुरुष प्रगतिशील सोच का राजनेता कहा जाता था, जो हमेशा युवाओं के भविष्य को देखते हुए काम करता रहा. देश की राजनीति को दिशा देने वाले राज्य उत्तर प्रदेश से सियासत शुरू करना और फिर उसे विकास की धारा में लाने का श्रेय तिवारी को ही जाता है. अपने मुख्यमंत्री काल में तिवारी ने ही नोएडा (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) की स्थापना की थी. ये वही नोएडा है जो यूपी को सबसे ज्यादा राजस्व देता है. इतना ही नहीं छोटे और मझोले कारोबारियों के हित में उन्होंने कई बड़े काम किए.

अर्थशास्त्र के अच्छे जानकार
एनडी तिवारी अर्थशास्त्र के भी जानकार माने जाते थे. उन्होंने मशहूर ब्रिटिश अर्थशास्त्री हैरॉल्ड जोसेफ लास्की का अच्छे से अध्ययन किया था. इसके बाद उन्होंने लास्की के आर्थिक सिद्धांतों और नेहरू के समाजवाद के सिद्धातों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश की और विकास को एक नई दिशा देने का प्रयास किया.

प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे
राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत जिस समय हुई एनडी तिवारी उस समय यूपी के सीएम थे. उनके ही राज में अयोध्या में राम मंदिर का शिला पूजन हुआ था. खास बात ये है कि एनडी तिवारी इस पूरे पूजा कार्यक्रम के खिलाफ रहे. राजीव गांधी के इस प्रयास का उन्होंने विरोध भी किया था. राजीव गांधी की हत्या के समय वह कांग्रेस के नंबर दो नेता की हैसियत से थे, लेकिन किन्हीं कारणों से नरसिम्हा राव पार्टी के अध्यक्ष चुने गए. हालांकि, फिर भी लोग तिवारी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार मान रहे थे. लेकिन वह अपनी नैनीताल सीट से ही हार गए थे.

अंतिम समय में ज्वाइन की थी बीजेपी
वह केंद्र की राजनीति में वित्त, विदेश, उद्योग, श्रम सरीखे अहम मंत्रालयों की कमान संभाल चुके थे. हालांकि, आंध्र प्रदेश केस के बाद वह हाशिए पर आ गए. इस बीच वह रोहित से कानूनी लड़ाई के लिए ही सुर्खियों में रहे. हालांकि, हाल में संपन्न हुए उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर लिया था और उसी रोहित के लिए टिकट मांगते दिखे थे.