नई दिल्ली. एनडीए से अलग होने के बाद तेलुगू देशम पार्टी मानसून सत्र में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है. शुक्रवार को लोकसभा में शक्ति परीक्षण होगा. आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो मोदी सरकार को इस पर कोई खतरा नहीं लग रहा है, लेकिन विपक्षी एकता के लिए ये काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. संभवत: इसी को ध्यान में रखते हुए यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने आंकड़ों को लेकर बयान दिया था. Also Read - कोरोना वायरस के 'इलाज और टीके' के लिए पीएम मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से बात

बता दें कि जब किसी पार्टी को लगता है कि मौजूदा सरकार सदन में बहुमत खो चुकी है, तब वह अविश्वास प्रस्ताव पेश करती है. यह तब लाया जाता है जब सदन में उसे कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन हासिल हो. इसके बाद मामला लोकसभा अध्यक्ष के पाले में चला जाता है. वह इसे मंजूरी देते हैं तो 10 दिनों के अंदर इस पर चर्चा होती है. इसके बाद स्पीकर इस पर वोटिंग कराते हैं.आइए जानते हैं कब-कब अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार गिर चुकी है… Also Read - मन को खुश रखने के लिए हफ्ते में 1-2 बार ये काम करते हैं पीएम मोदी, शेयर किया वीडियो

साल 1975 में इमरजेंसी लगाने के बाद साल 1977 में हुए चुनाव में इंदिरा गांधी की करारी हार हुई थी. जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद बनी सरकार में मोरारजी भाई देसाई प्रधानमंत्री बने थे. चूंकि इस सरकार में कई विचारधारा के लोग थे. ऐसे में कुछ ही दिन बाद इसमें उठापटक शुरू हो गया. ऐसे में विपक्ष को मौका मिल गया और उसने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला दिया. पहले अविश्वास प्रस्ताव में विपक्ष को मुंह की खानी पड़ी. Also Read - पंतजलि ने PM CARES Fund में 25 करोड़ रुपए का सहयोग दिया: योगगुरु रामदेव

मोरारजी देसाई ने दिया इस्तीफा
इसके बाद कांग्रेस नेता वाई वी चव्हाण एक बार फिर देसाई सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गए. इस बार देसाई सरकार में काफी अंसतोष था. ऐसे में मोरारजी को यकीन हो गया कि उनकी सरकार गिर जाएगी. हार का अंदाजा होते ही उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और सरकार गिर गई.

वीपी सिंह की सरकार
बोफोर्स घोटाले के बाद साल 1989 के चुनाव में कांग्रेस को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा. विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय मोर्चा को 146 सीटें मिलीं. बीजेपी (86), वामदल (52) ने राष्ट्रीय मोर्चा को समर्थन दे दिया. ऐसे में विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के प्रधानमंत्री बने. लेकिन, मंडल कमीशन से सरकार के खिलाफ शुरू असंतोष, आतंकियों की रिहाई से बढ़ते-बढ़ते बाबरी मस्जिद मुद्दे तक टूटने के कगार पर पहुंच गई. बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा रोकने और बिहार में उनके गिरफ्तार हो जाने के बाद बीजेपी सरकार ने समर्थन वापस ले लिया. इसके बाद आए विश्वास प्रस्ताव में सरकार नाकामयाब रही और गिर गई.

देवगौड़ा और गुजराल की सरकार
1 जून 1996 को एचडी देवगौड़ा देश के 11वें प्रधानमंत्री बने. अप्रैल 1997 में तक्तालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया. बाद में आईके गुजराल सरकार भी बहुमत साबित करने में नाकामयाब रही. दोनों सरकारें विश्वास मत साबित नहीं कर पाईं.

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार
साल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 महीने तक चली थी. लेकिन, इस बार फिर विपक्ष ने विश्वास प्रस्ताव ला दिया, जिसमें उनकी सरकार एक वोट से गिर गई थी. बता दें कि इससे पहले साल 1996 में मतविभाजन से पहले ही अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.