नई दिल्ली. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 15वें वित्त आयोग द्वारा राज्यों से मांगे गए सुझावों से संबंधित एक पत्र के जवाब में एक बार फिर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग रखी है. उन्होंने अपने पत्र में बिहार के पिछड़ेपने के कारणों का विस्तार से वर्णन किया है. उन्होंने कहा कि तेजी से विकास के बावजूद बिहार देश के अन्य राज्यों से पीछे है. राज्य प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक सेवाओं पर प्रति व्यक्ति खर्च में निचले पायदान पर है. नीतीश ने राज्य की अन्य समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि केंद्र किन परिस्थितियों में किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देता है… आइए जानते हैं…

स्पेशल कैटेगरी स्टेट्श है क्या?
हमारे संविधान में किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन, ऐसे राज्य जो दूसरों की तुलना में काफी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं, केंद्र सरकार उन्हें विशेष राज्य का दर्जा दे विशेष फंड से उनकी सहायता करती है. इसके लिए फंड की व्यवस्था बंद हो चुके योजना आयोग की बॉडी राष्ट्रीय विकास परिषद करती है. बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार ने योजना आयोग को बदलकर नीति आयोग बना दिया है.

इन शर्तों पर मिलता है विशेष राज्य का दर्जा
> ऐसे राज्य जहां पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र हों.
> ऐसे राज्य जिनका जनसंख्या घनत्व कम हो या फिर वहां जनजाति आबादी की संख्या ज्यादा हो.
> ऐसे राज्य जहां प्रति व्यक्ति आय कम कम हो.
> ऐसे राज्य जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े हों.
> बुनियादी ढ़ांचे में पिछड़े हों और आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो.

राज्यों को मिलती है ये सुविधा
> विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को केंद्र से जो फंड मिलता है उसमें 90 फीसदी अनुदान और सिर्फ 10 फीसदी कर्ज होता है. इस पर ब्याज नहीं लगता है. दूसरी तरफ सामान्य राज्य को मिले फंड का 70 फीसदी अनुदान होता है और 30 फीसदी कर्ज, जिस पर ब्याज लगता है.
> केंद्रीय बजट के योजित व्यय का 30 फीसदी इन राज्यों पर खर्च होता है.
> टैक्स में राहत मिलती है.
> उत्पाद शुल्क में दी जाती है रियायत.

पहले किसे मिला विशेष राज्य का दर्जा
पांचवे वित्त आयोग ने साल 1969 में गाडगिल फॉर्मूला के अनुसार, असम, नागालैंड और जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया था. बाद में 8 और राज्यों को भी यह दर्जा दिया गया. इनमें अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड हैं.

ये राज्य मांग रही विशेष राज्य का दर्जा
आंध्र प्रदेश, ओडिशा और ब बिहार काफी समय से विशेष राज्य का दर्जा मांग रहे हैं, हालांकि, क्राइटेरिया पूरा नहीं करने की वजह से उन्हें अभी तक इसकी सुविधा नहीं मिली है.

आंध्र प्रदेश भी कर रहा है संघर्ष
साल 2014 के चुनाव में एनडीए का हिस्सा रहे चंद्रबाबू नायडू ने विशेष राज्य की मांग पूरी न होने पर बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया था. उनका तर्क है कि हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनाने के बाद राज्य के राजस्व में कमी आई है.