नई दिल्ली. अपनी मांगों को लेकर देश भर से आए किसान-मजदूर बुधवार को दिल्ली में रैली कर रहे हैं. अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले कई संगठन इस रैली में शामिल हैं. सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) और अखिल भारतीय किसान महासभा ने मांगों का चार्टर सामने रखा है. संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें जब तक नहीं मानी गई, वे पूरे देश में आंदोलन करते रहेंगे. Also Read - संसद भवन की ओर किसानों के मार्च से दिल्ली की ट्रैफिक चरमराई

क्या है किसान-मजदूरों की मांग
> रोज बढ़ रही कीमतों पर लगाम लगाई जाए.
> किसानों के लिए स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू हों.
> खाद्य वितरण प्रणाली को ठीक किया जाए.
> रोजगार मिले
> मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी भत्ता 18 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए.
> मजदूरों के लिए बने कानून में मजदूर विरोधी बदलाव न हों.
> ग्रामीण इलाकों में मनरेगा बेहतर तरीके से लागू हो.
> ग्रामी इलाकों में खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और घर की सुविधा मिले.
> ठेकेदारी प्रथा से राहत मिले.
> जमीन अधिग्रहण के नाम पर उत्पीड़न बंद हो.
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स्वामीनाथन रिपोर्ट
साल 2004 में गठित स्वामीनाथन आयोग ने साल 2006 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. इसमें भूमि सुधार, सिंचाई, कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा, किसानों की आत्महत्या से सुरक्षा, क्रेडिट एवं बीमा, रोजगार और जैव संसाधन जैसे मुद्दों पर बिंदुवार तरीके से सुझाव दिया गया था. प्रोफेसर एम. एस स्वामीनाथ को हरित क्रांति का जनक माना जाता है. ऐसे में उनकी रिपोर्ट को पूरे देश में स्वीकार्यता मिली. ऐसा कहा जाने लगा कि उनके सुझावों को मानने के बाद किसानों की स्थिति बेहतर होगी.

एमएसपी पर क्या कहती है रिपोर्ट
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर स्वामीनाथ रिपोर्ट ने इसे औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिश की है. उनका मानना है कि इससे छोटे किसानों को फायदा होगा और वह बड़े किसानों की बराबरी में अनाज बेच सकेंगे. इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को कुछ फसल तक ही सीमित न रखा जाए. इसे सभी फसल के लिए अनिवार्य किया जाए.