मुंबई. महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं बरसी के दौरन हुई हिंसा को लेकर पूरे राज्य में तनाव है. इस मामले में भारिप बहुजन महासंघ के नेता और बाबासाहेब अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर ने हिंसा रोकने में सरकार की विफलता के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है. राज्यभर में बंद का असर भी देखा जा रहा है. Also Read - Lockdown in Maharashtra Latest Updates: अभी से खुद को तैयार कर लें लोग, महाराष्ट्र के इस जिले में कल से लग सकता है लॉकडाउन

महाराष्ट्र में स्कूल-कॉलेज बंद हैं. ट्रेनों और बसों पर भी इसका असर देखा जा रहा है. इस मुश्किल वक्त में राज्य में 200 साल पहले का इतिहास सभी के दिमाग में कौंध रहा है. भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं बरसी पर राज्य हिंसा की चपेट में आ गया. Also Read - Rajasthan में अब 4 और राज्यों से आने वालों के लिए कोरोना जांच रिपोर्ट जरूरी

इतिहास पर नजर डालें तो जनवरी 1818 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी और पेशवाओं की सेना में जंग हुई थी. माना जाता है कि अंग्रेजों की ओर से जिन लोगों ने पेशवाओं को हराया, वे महार जाति से ताल्लुक रखते थे. ऐसा भी कहा जाता है कि महार समाज ने अपने ऊपर हो रहे अन्याय के खिलाफ इस जंग में लड़ाई लड़ी थी. Also Read - Viral Video: रोज 250 ग्राम पत्थर खाता है ये शख्स, 30 साल से चल रहा सिलसिला, हुष्ट-पुष्ट तंदरुस्त है...

बताया जाता है कि पेशवा शासक महारों से सही रूप में बर्ताव नहीं करते थे. कुछ इतिहासकार बताते हैं कि महारों को अपनी कमर में एक झाड़ू बांधकर चलना होता था ताकि उनके पैरों के निशान झाड़ू से मिटते चले जाएं.

ऐसा भी कहा जाता है कि उस जमाने में दलितों के साथ बहुत भेदभाव होता था. इसी से दलित समाज के लोग नाराज थे और उन्होंने ऐसा माना जाता है कि अंग्रेजों की ओर से जिन लोगों ने पेशवाओं को हराया, वे महार जाति से ताल्लुक रखते थे. वे मानते हैं कि पेशवाओं की ‘ब्राह्मणवादी सत्ता’ के खत्म करने के लिए महार जाति के लोगों ने जंग लड़ी और हर साल 1 जनवरी को पुणे जिले में भीमा कोरेगांव जाते हैं.