किन अधिकारियों के नाम के आगे लगा सकते हैं 'माननीय और श्रीमान'? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बताया सही संबोधन का नियम

Allahabad HC Mananiya vs Shriman rule:इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि मंत्रियों, सांसदों और जजों के लिए 'माननीय' संबोधन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य प्रोटोकॉल है. वहीं, नौकरशाहों (Civil Servants) के लिए श्रीमान या पदनाम यूज के निर्देश दिए हैं.

Published date india.com Published: May 6, 2026 4:23 PM IST
Manniya and sriman allahabad HC on honble
किन अधिकारियों के नाम के आगे लगेगा माननीय और श्रीामन? जानें यहांं

Allahabad High Court Order on Honble: हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को फटकार लगाते हुए माननीय और श्रीमान संबोधन के इस्तेमाल पर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए सम्मानजनक प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है. संबोधन से जुड़ा मामला बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर के नाम के आगे सम्मानजनक शब्द न लगाने वाली FIR से शुरू हुआ था. आइये जानते हैं पूरा मामला…

UP पुलिस को फटकार

बीजेपी सांसद की शान में गुस्ताखी करने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस को इलाहाबाद हाई कोर्ट से तगड़ी फटकार पड़ी है. कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए संबोधन के तय नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता.

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मथुरा की वो FIR से शुरू हुआ विवाद

असल में ये मामला मथुरा के हाईवे थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है. इसमें बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का नाम तो शामिल था, लेकिन उनके नाम के आगे न तो ‘माननीय’ लिखा गया और न ही ‘श्रीमान’. जब ये मामला हाई कोर्ट के सामने आया तो संबोधन में चूक पर संज्ञान लिया. जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री, संसद सदस्य (MP) और विधानसभा के सदस्यों (MLA) को ‘माननीय’ कहकर संबोधित किया जाना चाहिए. यह उनके पद की गरिमा से जुड़ा प्रोटोकॉल है.

संवैधानिक पदों के लिए अनिवार्य प्रोटोकॉल

कोर्ट के आदेशानुसार, लोकसभा के स्पीकर, राज्यसभा के चेयरमैन, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के नाम के आगे ‘माननीय’ लगाना अनिवार्य है. अगर कोई व्यक्ति इन संवैधानिक पदों पर है, तो उसे उचित सम्मान देना कानूनी और प्रशासनिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है.

सॉवरेन भूमिका और संबोधन का नियम

हाई कोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया कि सिविल सर्वेंट (IAS/IPS/PCS) चाहे कितने भी बड़े पद पर क्यों न हों, यदि वे किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, तो उन्हें माननीय नहीं कहा जा सकता. उनके लिए ‘श्रीमान’ या उनके पद का नाम इस्तेमाल किया जाना चाहिए. अदालत के अनुसार, ‘माननीय’ शब्द उन लोगों के लिए आरक्षित है जो लोकतंत्र के तीन स्तंभ, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, में से किसी एक में ‘सॉवरेन’ संप्रभु भूमिका निभा रहे हैं. ब्यूरोक्रेसी इस केटेगरी में नहीं आती.

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UP पुलिस की सफाई

हाई कोर्ट की नाराजगी पर पुलिस ने जवाब दिया कि एफआईआर शिकायतकर्ता द्वारा दी गई हिंदी टाइपिंग वाली शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी. पुलिस ने शिकायत को ज्यों का त्यों कॉपी कर लिया था, जिससे यह चूक हुई. पुलिस ने कहा कि शिकायतकर्ता को इस प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं थी. इस पर अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस को सख्त निर्देश देते हुए कहा  कि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने साफ किया कि एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखे, भले ही शिकायतकर्ता ने कुछ भी लिखा हो.

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