नई दिल्लीः आईआईटी कानपुर के चार सीनियर प्रोफेसरों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहत दे दी है. इन पर साथी दलित प्रोफेसर के उत्पीड़न का आरोप लगा था. नेशनल कमिशन फॉर शेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) ने आईआईटी कानपुर मैनेजमेंट को निर्देश दिया था कि इन प्रोफेसरों को सस्पेंड किया जाए और इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए. जांच में इन प्रोफेसरों को अपने साथी प्रोफेसर के खिलाफ जातिसूचक शब्द के इस्तेमाल का दोषी पाया गया था. Also Read - पति को छोड़ किसी दूसरे के साथ लिव-इन में रह रही महिला, कोर्ट से मांगी सुरक्षा तो पड़ी फटकार, रिट याचिका भी खारिज

कमिशन ने इस मामले में आईआईटी-कानपुर प्रबंधन द्वारा निष्क्रियता पर नाराजगी जताई थी. कमिशन ने आईआईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर मनिन्द्र अग्रवाल से इस मामले में हुई कार्रवाई की एक मई तक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था. Also Read - Live-In Relationship: पति को छोड़ दूसरे के साथ रह रही महिला को हाईकोर्ट से झटका, लगाया जुर्माना

हाईकोर्ट पहुंचे थे प्रोफेसर
अपने निलंबन और गिरफ्तारी के डर से आरोपी प्रोफेसरों ने एनसीएसी के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाई कोर्ट ने बुधवार को एनसीएससी के फैसले पर रोक लगा दी. न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति अशोक कुमार की पीठ ने इशान शर्मा और तीन अन्य लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए केस दर्ज करने की सिफारिश पर रोक लगाने का आदेश दिया. Also Read - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को दी बड़ी राहत, जानें क्या है नया आदेश...

IIT को अनुशासनात्मक कार्रवाई की छूट
कोर्ट ने आयोग की उस सिफारिश पर भी रोक लगा दी जिसमें केंद्र सरकार के अधिकारियों को इनमें से एक याचिकाकर्ता डॉक्टर राजीव शेखर की आईआईटी-आईएसएम, धनबाद के निदेशक के तौर पर नियुक्ति पर रोक लगाने के लिए कहा गया था. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आईआईटी कानपुर का प्रशासन यदि चाहे तो कानून के मुताबिक इन प्रोफेसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है.

आयोग का फैसला न्यायसंगत नहीं
कोर्ट ने आयोग को नोटिस जारी किया और इस मामले में सहायक प्रोफेसर एस. सदरेला को जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, आयोग द्वारा फैसला सुनाया जाना न्यायसंगत नहीं है. साथ ही कोर्ट ने संस्थान द्वारा की गई कार्रवाई को भी गलत मानते हुए फिलहाल इस पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं.

क्या है मामला
आईआईटी कानपुर के असिस्टेंट प्रफेसर डॉ. सुब्रह्मण्यम सडरेला ने अपने चार सीनियर प्रफेसरों राजीव शेखर, इशान शर्मा, सी.एस. उपाध्याय और संजय मित्तल पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था. डॉ. सडरेला ने वरिष्ठ प्रफेसरों पर उन्हें जातिसूचक शब्दों से संबोधित करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था.

डॉ. सडरेला ने इस शिकायत पत्र को संस्थान के बोर्ड सदस्यों और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजा था. जिसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 13 अप्रैल को एक आदेश जारी कर आरोपी प्रफेसरों को निलंबित कर उन्हें प्रशासनिक पदों से हटाने और एफआईआर दर्ज करवाने का आदेश दिया था.