नई दिल्ली: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 2019 के चुनाव में पार्टी संगठन का नेतृत्व करेंगे. शाह का तीन वर्ष का कार्यकाल जनवरी 2019 में समाप्त हो रहा है, लेकिन चुनाव तक पार्टी का संगठनात्मक चुनाव स्थगित रखे जाने की संभावना है.Also Read - DDE Corridor: दिल्ली से देहरादून सिर्फ 2.30 घंटे में, मेरठ से लेकर हरिद्वार तक चमकेगी बीच के शहरों की सूरत

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सूत्रों ने बताया, 2019 के लोकसभा चुनाव तक अमित शाह भाजपा अध्यक्ष बने रहे रहेंगे और पार्टी उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरेगी. शाह का कार्यकाल जनवरी, 2019 में समाप्त हो रहा है और चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा संगठन में होने वाले चुनाव को टाला जा सकता है. पार्टी के एक नेता ने बताया कि विगत में भी निवर्तमान अध्यक्ष और उनकी टीम को चुनाव पर पूरा ध्यान देना सुनिश्चित करने के लिये चुनावी वर्ष में संगठनात्मक चुनाव को टाला गया है. Also Read - Farm Laws Repealed: हरियाणा के सीएम खट्टर ने की पीएम मोदी से मुलाकात, MSP पर कह दी बड़ी बात

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भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक से इतर पार्टी सूत्रों ने बताया कि लोकसभा चुनाव में शाह पार्टी संगठन का नेतृत्व करेंगे. लोकसभा चुनाव अगले वर्ष अप्रैल मई में संभव है. अमित शाह 2014 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद राजनाथ सिंह की जगह पार्टी अध्यक्ष बनाए गए थे. राजनाथ सिंह मोदी सरकार में गृहमंत्री बन गए थे, जिसके बाद शाह ने उनके बचे कार्यकाल को पूरा किया और पहली बार 3 साल का पूरा कार्यकाल उन्हें जनवरी, 2016 में मिला था.

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शनिवार को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरू हुई. इसे संबोधित करते हुए अमित शाह ने जहां कार्यकर्ताओं से मोदी सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने की अपील की, वहीं विपक्षी पार्टियों पर भी जमकर निशाना साधा. शाह ने अपने भाषण में महागठबंधन को झूठ पर आधारित गठबंधन बताया और कार्यकर्ताओं से अपील कि इसका सच देश की जनता तक ले जाएं. शाह ने कहा कि महागठबंधन में शामिल होने वाली पार्टियां 2014 के बाद भी भाजपा के हाथों पराजित हो चुकी हैं. इसलिए महागठबंधन हो भी जाए तो भाजपा की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. तीन तलाक पर कांग्रेस के रुख की आलोचना करते हुए शाह ने कहा कि कई इस्लामिक देशों में भी तीन तलाक खत्म हो चुका है, लेकिन भारत में यह बिल राज्यसभा में लंबित है क्योंकि कांग्रेस पार्टी इस पर विरोधाभासी रवैया अपनाती है.