नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आलोक कुमार वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर मंगलवर को बहाल करते हुए उनके अधिकार वापस लेने और छुट्टी पर भेजने के केन्द्र के फैसले को रद्द कर दिया. शीर्ष अदालत ने हालांकि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच पूरी होने तक उन्हें (वर्मा को) कोई भी बड़ा निर्णय लेने से रोक दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्मा के खिलाफ आगे कोई भी फैसला सीबीआई निदेशक का चयन एवं नियुक्ति करने वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा लिया जाएगा.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने आलोक वर्मा और गैर सरकारी संगठन कामन काज आदि की याचिकाओं पर सुनवाई की थी. इस प्रकरण में हालांकि प्रधान न्यायाधीश ने फैसला लिखा परंतु वह मंगलवार को कोर्ट में मौजूद नहीं थे. अत: यह फैसला न्यायमूर्ति कौल और न्यायमूर्ति जोसेफ ने सुनाया. पीठने अपने फैसले में कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति केन्द्रीय सतर्कता आयोग की जांच के नतीजों के आधार पर निर्णय लेगी. उसने कहा कि एक हफ्ते के भीतर समिति की बैठक बुलाई जाए.

पीठ ने इसके साथ ही वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम प्रमुख के तौर पर नियुक्ति रद्द की. न्यायालय ने केन्द्र के 23 अक्टूबर को सीबीआई प्रमुख के तौर पर वर्मा के अधिकार वापस लेने और उन्हें छुट्टी पर भेजने के फैसले को रद्द कर दिया. वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद उनके झगड़े के सार्वजनिक होने पर केन्द्र ने यह निर्णय लिया था.आलोक कुमार वर्मा का केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक के रूप में दो वर्ष का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है.

वर्मा का सीबीआई निदेशक के रूप में दो साल का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है. उन्होंने केन्द्र के फैसले को चुनौती देने हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था. केन्द्र ने शीर्ष अदालत के सामने वर्मा को उनकी जिम्मेदारियों से हटाकर अवकाश पर भेजने के अपने फैसले को सही ठहराया था और कहा था कि उनके और अस्थाना के बीच टकराव की स्थिति है जिस वजह से देश की शीर्ष जांच एजेंसी ‘जनता की नजरों में हंसी’ का पात्र बन रही है.अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा था केन्द्र के पास ‘हस्तक्षेप करने’ और दोनों अधिकारियों से शक्तियां लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजने का ‘अधिकार’ है.