नई दिल्ली: सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र के फैसले को लेकर विपक्ष ने पीएम पर हमला बोला है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को राजस्थान के हड़ौती में एक रैली में कहा कि कल रात चौकीदार ने सीबीआई निदेशक को हटा दिया. चौकीदार ने कल रात सीबीआई के निदेशक को हटाया क्योंकि जांच एजेंसी राफेल पर सवाल उठा रही थी.  CBI चीफ आलोक वर्मा राफेल घोटाले के कागजात इकट्ठा कर रहे थे. उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया. Also Read - SC का बड़ा आदेश- NIA, CBI, ED समेत देश के सभी पुलिस स्टेशनों और पूछताछ वाले कमरों में लगाएं जाएं CCTV

प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ है जो भी राफेल के इर्द गिर्द आएगा- हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा.देश और संविधान खतरे में हैं. उन्होंने एक बार फिर अपने आरोप को दोहराते हुए कहा कि पीएम ने अनिल अंबानी के लिए राफेल सौदे में दखलअंदाजी की. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने इस सौदे का कॉन्ट्रैक्ट HAL को दिया था. यूपीए सरकार के दौरान राफेल की कीमत 526 करोड़ रुपये प्रति विमान थी. Also Read - Bungalow Demolition Case: कंगना रनौत ने सुप्रीम कोर्ट में BMC की चुनौती के खिलाफ दायर की कैव‍ियट

इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की सबसे प्रतिष्ठित जांच संस्था सीबीआई को कमजोर करने, उसकी गरिमा को गिराने के लिये पूरी तरह से जिम्मेदार हैं. सुरजेवाला ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री ने कल सीबीआई प्रमुख और रॉ प्रमुख को अपने आवास पर क्यों बुलाया? क्या वो भ्रष्टाचार के मामले की चल रही जांच को प्रभावित करना चाहते हैं. कांग्रेस प्रवक्ता ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री व्यवस्थित रूप से सीबीआई, ईडी, एसएफआईओ, आयकर विभाग, सीबीडीटी, एनआईए जैसी प्रतिष्ठित जांच संस्थाओं को बंधक बनाकर उनकी स्वायत्तता को खत्म कर रहे हैं? Also Read - Chanda Kochar Latest News: चंदा कोचर को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, फैसले के खिलाफ याचिका खारिज; जानें- क्या है पूरा मामला

पूरा देश चाहता है कि सीबीआई के आला अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के जो गंभीर आरोप लगे हैं उनकी निष्पक्ष जांच हो, लेकिन प्रधानमंत्री गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से हस्तक्षेप कर रहे हैं. क्या प्रधानमंत्री गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सीबीआई और रॉ के अधिकारियों को अपने घर पर बुलाकर हिदायत दे सकते हैं? सीवीसी अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की बजाय चुप्पी क्यों साधे हुए है। क्या सीवीसी को भी कोई राजनीतिक व्यक्ति हिदायत दे रहा है? पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से जांच हो और दूध का दूध और पानी का पानी हो प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका गंभीर संदेह के घेरे में है.