नई दिल्ली: विवादों में उलझे सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को सरकार ने बुधवार सुबह छुट्टी पर भेज दिया. बताया जा रहा है कि देश की इस शीर्ष जांच एजेंसी के इतिहास में यह पहला ऐसा मामला है. एक सरकारी आदेश में कहा गया कि प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली नियुक्ति समिति ने मंगलवार की रात संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से सीबीआई निदेशक के पद का प्रभार दिया. इस आदेश का मतलब यह है कि सरकार ने सीबीआई के पदानुक्रम में संयुक्त निदेशक से वरिष्ठ स्तर यानी अतिरिक्त निदेशक रैंक के तीन अधिकारियों को दरकिनार कर नागेश्वर राव को एजेंसी के निदेशक का प्रभार दिया. जिन तीन अतिरिक्त निदेशकों को दरकिनार किया गया है उनमें ए के शर्मा भी शामिल हैं. अस्थाना की ओर से की गई शिकायत में शर्मा का नाम सामने आया था. Also Read - सरकार और किसानों की आज होने वाली बैठक टली, अब 20 जनवरी को होगी अगली मीटिंग

इस बीच सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा छुट्टी पर भेजे जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा की याचिका को स्वीकार कर लिया है. शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई हो सकती है. वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जा सकते हैं. बुधवार सुबह सीबीआई मुख्यालय सील कर दिया. वहां न तो सीबीआई कर्मियों और न ही बाहरी लोगों को जाने की इजाजत दी जा रही थी क्योंकि अधिकारियों की एक टीम इमारत में थी हालांकि, अब इमारत में प्रवेश की इजाजत दी जा रही है. घटनाक्रम जारी है और सरकार की ओर से विस्तृत बयान जारी करने के बाद इस मामले में स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी. सरकार अगले कुछ घंटों में बयान जारी कर सकती है.

गौरतलब है कि सीबीआई ने अपने ही स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना पर केस दर्ज किया है. एफआईआर में उन पर मांस कारोबारी मोइन कुरैशी से रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है. सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस मामले में दखल दिया था. डायरेक्टर वर्मा की पीएम से मुलाकात हुई और एक घंटे के भीतर ही केस से जुड़े डीएसपी रैंक के अधिकारी देवेंद्र कुमार गिरफ्तार हो गए. कुछ देर बाद तमाम अधिकारियों के ठिकानों पर सीबीआई ने छापे भी मारे. भ्रष्टाचार के आरोपों पर केस दर्ज करने वाले सीबीआई के निर्णय को राकेश अस्थाना समेत देवेंद्र कुमार ने चुनौती दी है. सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने जांच एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से जुड़े रिश्वतखोरी के आरोपों के संबंध में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि अस्थाना और देवेंद्र सिंह के खिलाफ जबरन वसूली और जालसाजी के आरोप जोड़े गए हैं. कुमार को कथित तौर पर घूस लेने, रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले में सोमवार को गिरफ्तार किया गया था. अपने ऊपर दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए अस्थाना ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. इस पर न्यायाधीश ने सीबीआई से कहा कि वह मामले में विशेष निदेशक के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर 29 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखे. अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि मामले की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए इस मामले में जारी जांच पर किसी तरह का स्थगन नहीं है.