नई दिल्‍ली: पवित्र अमरनाथ यात्रा बुधवार को शुरू हो गई है. इस पवित्र धाम की यात्रा करने के लिए इस साल दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना पंजीकरण कराया है. इस बार 20 दिन ज्‍यादा चलने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा 26 अगस्त को खत्म होगी. अमरनाथ यात्रा में भक्त 4,000 मीटर की गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं. अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए इस चार जगह मौके पर ही रजिस्‍ट्रेशन कराने की सुविधा दी गई है. Also Read - उत्‍तरी भारत समेत कई राज्‍यों में कुछ दिन तक ठंड और ढाएगी कहर, मौसम विभाग का शीत लहर का अलर्ट जारी

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श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इस बार यात्रा के दौरान जम्मू में चार जगहों पर मौके पर ही रजिस्‍ट्रेशन कराने की सुविधा तीर्थयात्रियों को मुहैया कराई है. जो कि सुविधा वैष्णवी धाम, सरस्वती धाम, जम्मू हाट और गीता भवन-राम मंदिर में है. दक्षिण कश्मीर हिमालय में होने वाली यात्रा इस बार 20 दिन ज्‍यादा यानी कुल 60 दिनों तक चलने वाली है. देश भर में कई रजिस्‍ट्रेशन केन्द्रों पर अब तक दो से अधिक तीर्थयात्रियों ने पहले ही पंजीकरण करवा लिया है. अमरनाथ तीर्थयात्रा के लिए हेलीकॉप्टर टिकटों की बुकिंग भी 27 अप्रैल से चल रही है. Also Read - मौसम विभाग का ताजा अलर्ट, दिल्‍ली, हरियाणा, वेस्‍ट यूपी समेत कई जगह गरज-चमक बारिश का अनुमान

अमरनाथ यात्रियों का पहला जत्था रवाना, अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच शुरू हुई यात्रा

अमरनाथ यात्रा पर सुरक्षा चाक-चौबंद

बता दें कि अमरनाथ यात्रा के दौरान इस बार सुरक्षा व्‍यवस्‍था बेहद कड़ी कर दी गई है. पिछले साल, यात्रा के दौरान एक बस पर आतंकवादी हमले हुआ था, जिसमें 56 तीर्थयात्री सवार थे. उस समय आठ तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 15 बुरी तरह घायल हो गए थे. ऐसे में कश्मीर में आतंकी हमले के अलर्ट के मद्देनजर तमाम सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. जहां सीआरपीएफ, सेना और एनएसजी के कमांडो यात्रा की सुरक्षा में मुस्तैद रहेंगे वहीं ड्रोन से भी नजर रखी जाएगी. इस यात्रा की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं.

अमरनाथ यात्रा 2018 के महत्‍वपूर्ण प्‍वाइंट

27 जून को जम्मू से पहला जत्था रवाना

यात्रा तिथि: 28 जून से 26 अगस्त, 2018

पंजीकरण: 1 मार्च 2018 से शुरू है

बैंक: पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू और कश्मीर बैंक, और यस बैंक

यात्रा के दिनों की संख्या: 60 दिन

प्रतिदिन तीर्थयात्रियों की संख्या: 1500 (प्रत्येक निर्धारित मार्गों पर 7500 प्रत्येक)

आयु सीमा: 14 से 74 वर्ष (13 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 75 से अधिक वयस्कों की अनुमति नहीं है)

पिछले साल 40 दिनों के लिए हुई थी यात्रा

बर्फानी बाबा की पवित्र गुफा 12756 फीट की उंचाई पर है

इस लिंक की मदद से कराएं पंजीकरण

http://www.jammu.com/shri-amarnath-yatra/step-by-step-registration-procedure.hindi.php

जानें अमरनाथ का इतिहास

अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है. यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 किलोमीटर दूर समुद्रतल से 13600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है. गुफा 11 मीटर ऊंची है. अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है, क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का बनना है. प्राकृतिक हिम से बने होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं. आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं. गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूँदें जगह-जगह टपकती रहती हैं. यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूंदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है. चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है. श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है. आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए. मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं.

अमरनाथ यात्रा के रास्‍ते 

अमर नाथ यात्रा पर जाने के भी दो रास्ते हैं. एक पहलगाम होकर और दूसरा सोनमर्ग बलटाल से. यानी कि पहलमान और बलटाल तक किसी भी सवारी से पहुंचें, यहां से आगे जाने के लिए पैदल चलना होता है. अशक्त या वृद्धों के लिए सवारियों का प्रबंध किया जा सकता है. पहलगाम से जानेवाले रास्ते को सरल और सुविधाजनक समझा जाता है. बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी केवल 14 किलोमीटर है और यह बहुत ही दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी संदिग्ध है. इसीलिए सरकार इस मार्ग को सुरक्षित नहीं मानती और अधिकतर यात्रियों को पहलगाम के रास्ते अमरनाथ जाने के लिए प्रेरित करती है. लेकिन रोमांच और जोखिम लेने का शौक रखने वाले लोग इस मार्ग से यात्रा करना पसंद करते हैं. इस मार्ग से जाने वाले लोग अपने जोखिम पर यात्रा करते हैं. रास्ते में किसी अनहोनी के लिए भारत सरकार जिम्मेदारी नहीं लेती है.