कोलकाता: नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने शुक्रवार को कहा कि ‘मां दुर्गा’ के जयकारे की तरह ‘जय श्रीराम’ का नारा बंगाली संस्कृति से नहीं जुड़ा है और इसका इस्तेमाल ‘‘लोगों को पीटने की बहाने’’ के तौर पर किया जाता है. Also Read - एक के बाद एक वेब सीरीज कर रहे हैं अभिषेक बच्चन, अब 'बॉब बिस्वास' के लिए हैं बिल्कुल तैयार

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सेन ने यहां जादवपुर विश्वविद्यालय में कहा कि ‘मां दुर्गा’ बंगालियों के जीवन में सर्वव्याप्त हैं. उन्होंने कहा, ‘‘जय श्री राम नारा बंगाली संस्कृति से नहीं जुड़ा है.’’ उन्होंने कहा कि आज कल राम नवमी ‘‘लोकप्रियता हासिल’’ कर रही है और उन्होंने पहले कभी इसके बारे में नहीं सुना था. Also Read - बांग्लादेशी ऑलराउंडर शाकिब अल हसन को Facebook Live के दौरान जान से मारने की मिली धमकी

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपनी चार साल की पोती से पूछा कि उसके पसंदीदा भगवान कौन है? उसने जवाब दिया कि मां दुर्गा. मां दुर्गा हमारी जिंदगी में मौजूद हैं. मुझे लगता है कि जय श्री राम जैसा नारा लोगों को पीटने के लिए आड़ के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.’’

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