नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ओला और उबर जैसे मोबाइल एप आधारित टैक्सी सेवा पर नियंत्रण करने के लिए केंद्र सरकार को कानून बनाने के लिए कहा है. जस्‍ट‍िस एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता निपुण सक्सेना को परिवहन मंत्रालय के समक्ष इसका प्रजेंटेशन देने और इस एप आधारित सेवा पर कानून की सलाह देने के लिए कहा है. Also Read - Diwali Bonus: लॉकडाउन के दौरान समय पर EMI चुकाने वालों को कैशबैक देगी सरकार, जानें क्या है पूरा मामला

कोर्ट का यह आदेश तब आया है, जब याचिकाकर्ता ने उसे बताया कि इन सेवा प्रदाताओं पर नियंत्रण के लिए कोई कानून नहीं है. निपुण सक्सेना ने दिल्ली में 2012 में हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद याचिका दायर की थी. Also Read - Bank loan Interest Relief: कर्जदारों को केंद्र सरकार का बड़ा दिवाली तोहफा, बैंक से इतने रुपये तक का कर्ज लेने वालों को ब्याज में दी राहत

याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि केंद्र ने एक क्राइसिस सेंटर चलाने के लिए दिशानिर्देश और मानक तय किए हैं, लेकिन राज्य सरकारें अनुपालन नहीं कर रही हैं. इसलिए अदालत ने महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में वन-स्टॉप क्राइसिस सेंटर का आवाह्न किया. Also Read - Loan Moratorium Update: लोन मोरेटोरियम के दौरान कर्ज पर ब्याज छूट को लेकर वित्त मंत्रालय ने जारी किया यह दिशानिर्देश

क्राइसिस सेंटर एक समुदाय आधारित संगठन है, जो यौन हिंसा के पीड़ितों को काउंसलिंग और अन्य सुविधाओं के जरिए उनकी सहायता करता है.