नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पैंगोंग सो और डेपसांग के अलावा गतिरोध के अनेक स्थानों से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने शनिवार को विस्तार से बातचीत की. कुल मिलाकर भारत-चीन के बीच तनाव जारी है. इस बीच भारतीय सेनाएं अपनी ताकत में इजाफा करने में जुटी है. सेनाएं लेजर गाइडेड बमों से लैस हेरोन ड्रोन हासिल करने की प्रक्रिया पर काम कर रही हैं. Also Read - क्या सिचाचिन में तैनात जवानों को नहीं मिल रही भरपूर कैलोरी की मात्रा? सरकार ने दिया ये जवाब

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक दुश्मन के ठिकानों और बख्तरबंद वाहनों को ध्‍वस्‍त करने के लिए एंटी-टैंक मिसाइलें हासिल करने की कोशिशें भी जारी हैं. भारतीय सेना का ये खरीद प्रस्ताव लंबे समय से लंबित था. इसे चीता नाम दिया गया है. इस खरीद पर 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी. Also Read - लद्दाख सीमा विवाद: ‘चाइना स्टडी ग्रुप’ की करीब 90 मिनट तक चली बैठक, रक्षा मंत्री से लेकर सेना प्रमुखों ने की तैयारियों की समीक्षा

एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस प्रोजेक्‍ट के तहत तीनों सेनाओं के लगभग 90 हेरॉन ड्रोनों को लेजर गाइडेड बमों से लैस किया जाएगा. यही नहीं हवा से जमीन पर और हवा से मार करने वाली एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों की भी खरीद होगी. बता दें कि भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में पहले से ही मानवरहित हेरोन ड्रोन (हेरोन यूएवी) हैं. खबर के मुताबिक भारत इजराइल से और हेरोन ड्रोन व स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें खरीदेगा. Also Read - चीन ने किया स्वीकार- गलवान घाटी की झड़प में मारे गए थे उसके सैनिक, ट्वीट कर कही ये बात

इस परियोजना से तीनों सेनाओं की सर्विलांस क्षमता के साथ ही हमला करने की ताकत में इजाफा होगा. वर्तमान में तीनों सेनाएं लद्दाख सेक्टर में सर्विलांस हेरॉन अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) का इस्तेमाल कर रही हैं. बता दें कि हेरोन ड्रोन लगातार दो दिनों से अधिक समय तक उड़ान भरने और 10 हजार मीटर की ऊंचाई से टोल लेने में सक्षम है. अब सेना का यह अपग्रेड प्रोजेक्ट सशस्त्र बलों के ग्राउंड स्टेशन हैंडलर को इन विमानों को दूर-दूर से संचालित करने और उपग्रह संचार प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित करने में सक्षम करेगा.