नई दिल्ली: सरकार और रिजर्व बैंक के बीच विभिन्न मुद्दों पर जारी खींचतान के बीच ऐसा माना जा रहा है कि गवर्नर उर्जित पटेल ने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की. सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि शुक्रवार को पटेल दिल्ली में थे और उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. पिछले कुछ हफ्तों से सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है. उम्मीद की जा रही है कि पटेल की मोदी से मुलाकात का मकसद सरकार के साथ जारी खींचतान का समाधान खोजना हो सकता है.

सूत्रों ने जानकारी दी कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा छोटे एवं मझोले उद्योगों को कर्ज देने की विशेष व्यवस्था के संकेत मिले हैं. लेकिन यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए नकदी की स्थिति को आसान बनाने और आरबीआई के अपने अधिशेष में से कुछ राशि जारी करने पर कोई सहमति बनी है या नहीं. सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच स्वायत्तता के मुद्दे को लेकर हाल ही में काफी तनाव की स्थिति बन गई है. इस खींचतान के चलते वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक कानून की धारा सात के तहत विचार विमर्श शुरू किया है. यह धारा सरकार को जनहित के मुद्दों पर रिजर्व बैंक गवर्नर को निर्देश देने का अधिकार देती है.

गौरतलब है कि सरकार ने शुक्रवार को कहा था कि वह भारतीय रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपये की पूंजी की कोई मांग नहीं कर रही है बल्कि वह केवल केंद्रीय बैंक की आर्थिक पूंजी व्यवस्था तय करने के बारे में चर्चा कर रही है. वित्त मंत्रालय में आर्थिक विभाग के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने ट्वीट में कहा, ‘मीडिया में गलत जानकारी वाली तमाम अटकलबाजियां जारी हैं. सरकार का राजकोषीय हिसाब-किताब बिल्कुल सही चल रहा है. अटकलबाजियों के विपरीत सरकार का आरबीआई से 3.6 या एक लाख करोड़ रुपये मांगने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

गर्ग ने कहा कि इस समय, ‘केवल एक प्रस्ताव पर ही चर्चा चल रही है और वह रिजर्व बैंक की आर्थिक पूंजी की व्यवस्था तय करने की चर्चा है. आर्थिक मामलों के सचिव ने विश्वास जताया कि सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3.3 प्रतिशत तक सीमित रखने के बजट में तय लक्ष्य के भीतर बनाए रखने में कामयाब होगी. गर्ग ने कहा कि सरकार का राजकोषीय हिसाब-किताब ठीक चल रहा है.

उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2013-14 में सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.1 प्रतिशत के बराबर था. उसके बाद से सरकार इसमें लगातार कमी करती आ रही है. हम वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में राजकोषय घाटे को 3.3 तक सीमित कर देंगे. उन्होंने राजकोषीय लक्ष्यों को लेकर अटकलों को खारिज करते हुए कहा, ‘सरकार ने दरअसल बजट में इस साल बाजार से कर्ज जुटाने का जो अनुमान रखा था उसमें 70000 करोड़ रुपय की कमी स्वयं ही कम कर दी है.

(इनपुट-भाषा)