वाशिंगटन: अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह से बातचीत की और एक “मजबूत तथा दीर्घकालिक” द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी पर अपनी सहमति दोहराई. अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान पेंटागन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. पेंटागन ने कहा कि फोन कॉल के दौरान एस्पर और सिंह ने विभिन्न क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की. Also Read - पीएम मोदी के बयान से 'विस्तारवादी' चीन को लगी मिर्ची, कहा- 'हमने 12 पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद सुलझाया'

पेंटागन ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि एस्पर ने हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत के नेतृत्व पर दृढ़ प्रतिबद्धता जताई. वक्तव्य में कहा गया, “एस्पर ने एक मजबूत और दीर्घकालिक भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के प्रति समर्थन को दोहराया और दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय कदम उठाने के तरीकों पर चर्चा की.” Also Read - लद्दाखवासी कहते हैं चीन ने हमारी जमीन ली और प्रधानमंत्री कहते हैं नहीं, कोई तो झूठ बोल रहा है: राहुल

भारत में अम्फान चक्रवात से होने वाली मौतों पर एस्पर ने शोक प्रकट किया और दोनों नेताओं ने कोविड-19 महामारी के बीच परस्पर सहयोग पर चर्चा की. वक्तव्य के अनुसार, विदेश मंत्री एस्पर ने जल्दी ही भारत आने की इच्छा जताई है. Also Read - इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें या तो हार गईं या वापस लौटने के लिए मजबूर हुईं हैं: PM मोदी

बता दें कि दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत ऐसे समय में हुई है जब लद्दाख में चीन और भारत के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लद्दाख में और उत्तरी सिक्किम में कई क्षेत्रों में भारत और चीन, दोनों देशों की सेनाओं ने हाल ही में सैन्य जरूरतों के लिये निर्माण कार्य किये हैं. टकराव की दो अलग-अलग घटनाएं दो सप्ताह बाद भी दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने तथा दोनों पक्षों द्वारा अपने-अपने मोर्चे और अधिक मजबूत करने के स्पष्ट संकेत हैं.

इससे पहले चीन ने भारत के साथ सीमा पर अपने मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मध्यस्थता का प्रस्ताव शुक्रवार को खारिज कर दिया. चीन ने कहा कि दोनों (पड़ोसी) देश वार्ता के जरिये अपने मतभेद दूर करने में सक्षम हैं और उन्हें किसी ‘‘तीसरे पक्ष’’ के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.

(इनपुट भाषा)