नई दिल्ली. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण अपना पश्चिम बंगाल का दौरा बीच में ही छोड़कर दिल्ली लौटना पड़ा है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमित शाह को बुखार के बाद डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी है. बता दें कि स्वाइन फ्लू से जूझ रहे अमित शाह बीते दिनों एम्स में भर्ती थे. तबीयत खराब होने के बाद शाह के बुधवार को झारग्राम में होने वाली रैली में शामिल होने पर संशय है. Also Read - Bihar Politics: JDU के बाद BJP ने दिया तगड़ा झटका, चिराग को छोड़ गए 200 से अधिक नेता-कार्यकर्ता

इसके पहले मंगलवार को मालदा में विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा था कि उनका प्रस्तावित महागठबंधन ‘लोभ-लालच’ का गठबंधन है, जिसमें प्रधानमंत्री पद के नौ संभावित उम्मीदवार हैं. शाह ने दावा किया कि 20-25 नेताओं को एक मंच पर साथ ले आने से कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योंकि नरेंद्र मोदी ही फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे. विपक्ष की विशाल रैली के तीन दिनों बाद शाह ने यहां भाजपा की रैली में कहा, लेकिन हमारे पास प्रधानमंत्री पद का एक ही उम्मीदवार है और वह हैं नरेंद्र मोदी. Also Read - COVID-19 Vaccine Drive: दूसरे चरण के पहले दिन उपराष्ट्रपति, PM मोदी, अमित शाह समेत इन नेताओं ने लगवाई वैक्सीन

‘गणतंत्र बचाओ यात्रा’ की शुरुआत
बंगाल में ‘गणतंत्र बचाओ यात्रा’ की शुरुआत करते हुए शाह ने राज्य में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का इरादा जाहिर किया. तृणमूल कांग्रेस ने शाह पर पलटवार करते हुए कहा कि उनका भाषण ‘‘तथ्यों के मामले में कमजोर और अभद्र’’ था एवं ऐसा लगता है कि भाजपा हताश हो गई है और उसे समझ आ चुका है कि उसके दिन गिने-चुने रह गए हैं. मोदी सरकार को नागरिकता विधेयक पारित कराने को लेकर प्रतिबद्ध बताते हुए शाह ने सवाल किया कि ममता इस विधेयक का समर्थन करेंगी कि नहीं. लोकसभा में पारित हो चुका नागरिकता विधेयक राज्यसभा में लंबित है. राज्यसभा में सत्ताधारी एनडीए का बहुमत नहीं है. Also Read - PM मोदी के बाद गृह मंत्री Amit Shah ने भी लगवाई कोरोना वैक्सीन, मेदांता के डॉक्टरों ने लगाया टीका

ममता बनर्जी पर साधा निशाना
ममता बनर्जी की सरकार को ‘‘हत्या कराने वाली सरकार’’ बताते हुए उन्होंने कहा कि आम चुनावों में उनकी हार होगी. शाह ने कहा, ‘‘महागठबंधन सिर्फ लोभ-लालच का गठबंधन है. वे मोदी को हटाना चाहते हैं जबकि हम गरीबी और भ्रष्टाचार हटाना चाहते हैं. वे ‘मजबूर सरकार’ चाहते हैं, ताकि वे भ्रष्टाचार में शामिल हो सकें। हम ‘मजबूत सरकार’ चाहते हैं ताकि हम पाकिस्तान को करारा जवाब दे सकें. अब लोगों को तय करना है कि वे ‘मजबूत’ सरकार चाहते हैं या ‘मजबूर’ सरकार.

एक मंच पर नेताओं के आने से नहीं होगा फायदा
उन्होंने कहा, ममता दीदी को समझना चाहिए कि सिर्फ 20-25 नेताओं को एक मंच पर साथ ले आने से कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योंकि लोग नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने के लिए ही वोट डालेंगे. इस देश के 100 करोड़ लोग मोदी के साथ हैं. कोलकाता में हुई विपक्षी पार्टियों की रैली पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विरोधी पार्टियों ने रैली के दौरान एक बार भी ‘भारत माता की जय’ या ‘वंदे मातरम’ नहीं बोला और सिर्फ ‘मोदी मोदी’ करते रहे.