नई दिल्लीः गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 14वें स्थापना दिवस पर कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि लोगों को आरटीआई दाखिल करने की जरूरत ही न पड़े, बल्कि सरकार खुद सामने आकर सूचनाएं दे. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में हम इसी तरह का प्रशासन देना चाहते हैं कि सूचना का अधिकार के आवेदन कम से कम आएं और लोगों को आरटीआई लगाने की जरूरत ही न पड़े. उन्होंने कहा कि आजादी से पहले प्रशासन का उद्देश्य अपने आकाओं की इच्छा की पूर्ति करना था, इसके कारण बड़े कालखंड में जनता और प्रशासन के बीच बड़ी खाई बन गई थी, मगर आरटीआई ने इस खाई को पाटने का काम किया है. Also Read - गुजरात को पीएम नरेंद्र मोदी की सौगात, इस दिन सी-प्लेन, जंगल सफारी व अन्य प्रोजेक्ट्स का करेंगे उद्घाटन

Also Read - Mann Ki Baat Today: PM मोदी ने त्योहारों पर Vocal For Local होने पर दिया जोर, जानें कार्यक्रम की खास बातें

अमित शाह ने कहा, “2016 में जब मैंने कानून का अध्ययन किया तो मुझे भी लगा कि इसका दुरुपयोग हो सकता है, लेकिन आज हम कह सकते हैं कि दुरुपयोग बहुत कम हुआ है और सदुपयोग बहुत ज्यादा हुआ है.” आरटीआई के दुरुपयोग की तरफ इशारा करते हुए अमित शाह ने कहा कि अकारण इस अधिकार का उपयोग न करें, इसका उपयोग परदर्शिता और गतिशीलता लाने के लिए ही करें. सूचना के अधिकार के साथ-साथ लोगों में दायित्व की भावना को भी जगाना जरूरी है. Also Read - पीएम कहते थे कि जो हवाई चप्पल पहनते हैं वे हवाई जहाज में चलेंगे, लेकिन कोरोना संकट के समय कहां चले गए थे: सोरेन

Video: समुद्र किनारे मार्निंग वाक में थैला लेकर पीएम मोदी ने की सफाई, दिया स्वच्छता अभियान का संदेश

अमित शाह ने सरकारी कार्यों में पारदर्शिता का उदाहरण देते हुए कहा कि सौभाग्य योजना के तहत लोग डेशबोर्ड में ये देख सकते हैं कि उनके घर में बिजली कब लगने वाली है. उन्होंने कहा, “केदारनाथ धाम के नए स्वरूप का निर्माण हो रहा है, वहां घाटी में ऑल वेदर रोड बन रही हैं. आपको आश्चर्य लगेगा लेकिन वहां की पूरी निगरानी ड्रोन के माध्यम से ऑनलाइन हो रही है.” आरटीआई दिवस के मौके पर केंद्रीय सूचना आयोग के 14 वें स्थापना दिवस पर गृह मंत्री ने कहा कि आरटीआई एक्ट अन्याय रहित सुशासन देने की दिशा में अच्छा प्रयास है, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासनिक व्यवस्था देने और अधिकारों के अतिक्रमण को नियंत्रित करने में भी आरटीआई ने अपनी पूरी भूमिका निभाई है.

पीएम मोदी- शी जिनपिंग की मुलाकात से कमल हासन की पूरी हुई बरसों पुरानी हसरत, जानिए कैसे

उन्होंने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग से लेकर हर राज्य में सूचना आयोग की स्थापना की गई है. इस अधिनियम के तहत लगभग 5 लाख से ज्यादा सूचना अधिकारी इस कानून के तहत काम कर रहे हैं. भारत विश्व में पहला ऐसा देश है जो नीचे तक सूचना तंत्र की रचना करने में सफल हुआ है और एक जवाबदेह सूचना तंत्र का गठन कर पाया है. गृह मंत्री ने बताया कि 1990 तक केवल 11 ही देशों में आरटीआई का कानून था. वैश्वीकरण, आर्थिक उदारीकरण और तकनीक इनोवेशन के युग की शुरुआत होते ही ये संख्या बढ़ने लगी.

आरटीआई के कारण कई देशों में अच्छे प्रशासनिक बदलाव देखने को मिले हैं जिनमें भारत भी शामिल है. उन्होंने कहा कि पिछले 14 साल में आरटीआई एक्ट के कारण जनता और प्रशासन के बीच की खाई को पाटने में बहुत मदद मिली है और जनता का प्रशासन व व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ा है.