नई दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बृहस्पतिवार को पार्टी की प्रदेश इकाइयों के प्रमुखों और महासचिवों की एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे. बैठक का उद्देश्य पार्टी के संगठनात्मक चुनावों के कार्यक्रम सहित ब्यौरे को अंतिम रूप देना है. संगठनात्मक चुनाव की इस प्रक्रिया के तहत आगे चल कर पार्टी के नये अध्यक्ष का भी चुनाव हो सकेगा. पार्टी के एक नेता ने बताया कि संगठनात्मक चुनाव पूरा होने में कई महीने का वक्त लग सकता है और तब तक शाह इसके अध्यक्ष पद पर बने रह सकते हैं.

शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल वाली सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री हैं. भाजपा सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में पार्टी की इकाइयों में बूथ स्तर से ऊपर के संगठनात्मक चुनावों और सदस्यता अभियान के कार्यक्रम पर फैसला किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद ही नये पार्टी अध्यक्ष का चुनाव हो सकेगा, जो अक्टूबर- नवंबर महीने तक जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का संसदीय बोर्ड (इसकी निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था) इस अवधि के लिए एक नये अध्यक्ष को नियुक्त कर सकता है. हालांकि, यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अब शाह इस कार्य को कैसे जारी रखना चाहते हैं.

सूत्रों ने बताया कि भाजपा शासित तीन राज्यों- हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र- में विधानसभा चुनाव इस साल के आखिर में होने हैं, ऐसे में पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी निभाते रहने को कह सकती है. भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी प्रदेश के नेताओं के साथ बृहस्पतिवार की बैठक में शामिल होंगे. राज्यों के महासचिवों (संगठन) के साथ भी शाह की बैठक शुक्रवार को होने का कार्यक्रम है. पार्टी प्रमुख के बाद संगठन के प्रभारी महासचिव का भाजपा में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद है, चाहे यह राज्य स्तर पर हो या फिर राष्ट्रीय स्तर पर.

गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष के तौर पर शाह का तीन साल का कार्यकाल इस साल की शुरूआत में समाप्त हो गया था लेकिन उन्हें इस पद पर बने रहने को कहा गया था. दरअसल,पार्टी ने लोकसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करने के लिए संगठन चुनाव टाल दिया था. लोकसभा चुनाव में 303 सीटों के साथ भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद शाह ने तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए संगठन की तैयारियों पर जोर दिया है और इसके अंदरूनी चुनावों के लिए आधार तैयार किया है. उन्होंने नौ जून को महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा की पार्टी इकाइयों के कोर ग्रुप के साथ अलग- अलग बैठकें की थीं. इसका उद्देश्य विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में भाजपा की रणनीति पर चर्चा करना था.