नई दिल्ली: केंद्र की ओर से पारित तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग के साथ किसानों का आंदोलन तेज होता देख सरकार की तरफ से समाधान निकाले जाने को लेकर कोशिशें जारी हैं. सोमवार को देशभर में किसान भूख हड़ताल कर रहे हैं, इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी मांगों और संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ बैठक की. चूंकि किसानों का आंदोलन 19वें दिन भी जारी रहा, दोनों मंत्रियों ने विरोध प्रदर्शन को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए उनकी मांगों को हल करने के तरीकों पर चर्चा की. Also Read - बीजेपी में जाने पर भी खटपट! ज्योतिरादित्य सिंधिया की इस बड़े BJP नेता से बढ़ रही हैं दूरियां, सियासी घमासान के आसार

जल्द समाधान किए जाने की इसलिए भी जरूरत है, क्योंकि किसानों के आंदोलन से दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों की प्रमुख सड़कें बाधित होने के कारण विभिन्न जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. इसके साथ ही आमजन के आवामगन पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है. Also Read - Kisan Andolan: 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने पर अडिग किसान यूनियन, आज सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

सूत्रों ने कहा कि शाह के छह, कृष्ण मेनन मार्ग स्थित आवास पर हुई बैठक में दोनों ने देश भर के किसानों और उनके नेताओं से संपर्क के बाद गतिरोध को दूर करने के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है. लगभग 40 मिनट की बैठक में दोनों नेताओं ने कथित तौर पर उन 32 किसान प्रतिनिधियों के साथ फिर से संपर्क करने के विचार पर चर्चा की, जिन्होंने अब तक केंद्र के साथ पांच दौर की वार्ता की है. Also Read - पाकिस्तान में 'सर्जिकल स्ट्राइक' से जनता में विश्वास आया कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश सुरक्षित: शाह

रविवार को शाह ने अपने आवास पर तोमर की उपस्थिति में पंजाब भाजपा नेताओं के साथ भी किसानों के मुद्दों पर चर्चा की. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश भी बैठक में मौजूद रहे. इस बीच, किसान नेताओं ने सोमवार को अलग-अलग जगहों पर एक दिवसीय ‘भूख हड़ताल’ शुरू की और तीनों कृषि कानूनों को वापस करने के लिए केंद्र से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलने की स्थिति में विभिन्न राज्यों में जिला कलेक्ट्रेट/उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर धरना प्रदर्शन किया.

किसान संगठन कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम 2020, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 का विरोध कर रहे हैं और इन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं. सरकार इसके बजाय कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार है, मगर कानूनों को वापस लेने के लिए राजी नहीं है.

(इनपुट आईएएनएस)