अमृतसर: अमृतसर के निकट शुक्रवार को रावण दहन के दौरान हुए दर्दनाक ट्रेन  हादसे में मारे गए 61 लोगों में से अब तक 39 लोगों की शिनाख्त की जा सकी है. इस बाबत अधिकारियों ने शनिवार को जानकारी दी. वहीँ इस हादसे पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन का कहना है कि दशहरे के कार्यक्रम को लेकर रेलवे को न तो कोई सूचना दी गई थी और न ही अनुमति ली गई थी. Also Read - Train services Latest Updates: क्या फिर से रुकने वाली हैं ट्रेनें? भारतीय रेलवे ने दिया बड़ा बयान

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अमृतसर ट्रेन हादसा:’रावण दहन’ पिछले 20 वर्षों से इसी जगह होता आ रहा है: स्थानीय लोग Also Read - Railway Board Chairman News: सुनीत शर्मा रेलवे बोर्ड के नए अध्यक्ष बने, वीके यादव की जगह ली

जबकि स्थानीय लोगों के मुताबिक इस स्थान (हादसे वाली जगह पर) पिछले 20 वर्षों से रावण दहन का कर्यक्रम आयोजित होता आया है. अधिकारियों के मुताबिक ट्रेन हादसे में घायल हुए लोगों को सात अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. उन्होंने बताया कि 29 शवों का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है. बता दें कि अमृतसर में जोड़ा फाटक के निकट शुक्रवार शाम को रावण दहन देखने के लिए रेल की पटरियों पर खड़े लोग एक ट्रेन की चपेट में आ गए जिसमें कम से कम 61 लोगों की मौत हो गई और 72 अन्य घायल हो गए. वही रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है.

हादसा दो स्टेशनों के बीच न कि रेलवे फाटक पर

अमृतसर के समीप जोड़ा फाटक पर जब यह हादसा हुआ उस समय ट्रेन जालंधर से आ रही थी और पटरियों से सटे मैदान पर ‘रावण दहन’ देखने के लिए कम से कम 300 लोग वहां जुटे हुए थे. इस हादसे को लेकर अमृतसर रेल हादसे पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने एक बयान में कहा कि रेलवे पटरियों के निकट हो रहे दशहरा कार्यक्रम के बारे में विभाग को सूचित नहीं किया गया था. इस दुर्घटना में कम से कम 61 लोगों की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि यह हादसा दो स्टेशनों- अमृतसर एंव मनावाला के बीच हुई न कि रेलवे फाटक पर.

रेलवे फाटक कर्मी का काम यातायात नियंत्रित करना !

लोहानी ने रेलवे कर्मचारियों का बचाव करते हुए जानकारी न देने की व्याख्या करते हुए कहा, “बीच के रास्ते पर ट्रेनें अपनी निर्धारित गति से चलती हैं और लोगों से उम्मीद की जाती है कि वह पटरियों पर मौजूद नहीं होंगे. बीच के खंड पर रेल कर्मचारी तैनात नहीं होते हैं. रेलवे फाटक पर कर्मी होते हैं जिनका काम यातायात नियंत्रित करना है.’’

अमृतसर ट्रेन हादसा: चली गई 61 जानें, अश्विनी लोहानी ने बताया, ड्राइवर ने क्यों नहीं लगाए इमरजेंसी ब्रेक

हादसे के लिए रेलवे उत्तरदायी नहीं: लोहानी

उन्होंने कहा कि गेटमैन रेलवे फाटक से 400 मीटर की दूरी पर था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर ड्राइवर ने आपात ब्रेक लगाए होते तो इससे भी बड़ा हादसा हो सकता था. लोहानी ने बताया कि ट्रेन अपनी निर्धारित गति से चलती है और शुरुआती रिपोर्ट से मालूम होता है कि चालक ने ब्रेक लगाए थे और ट्रेन धीमी हो गई थी. उन्होंने कहा, “हमारे पास न तो इसकी कोई सूचना थी और न ही हमसे अनुमति ली गई थी. यह कार्यक्रम रेलवे की जमीन के बगल वाले स्थान, एक निजी स्थान पर आयोजित किया गया था.” रेलवे को दोषी ठहराने से इनकार करते हुए लोहानी ने कहा कि राष्ट्रीय परिवाहक लोगों से अतिक्रमण नहीं करने की नसीहत देते हुए लंबे अरसे से अभियान चला रहा है.