नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का सोमवार तड़के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह पिछले कुछ महीनों से फेफड़े के कैंसर से जूझ रहे थे.अनंत कुमार मौजूदा एनडीए सरकार में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और रसायन एवं उर्वरक मंत्री थे. छह बार के सांसद कुमार आरएसएस कार्यकर्ता से केंद्रीय मंत्री बनने तक राजनीतिक सोपान तेजी से चढ़ते गए. कुमार भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के हमेशा करीब रहे. वह चाहे अटल बिहारी वाजपेयी या लालकृष्ण आडवाणी का दौर रहा हो या मौजूदा नरेंद्र मोदी का दौर.

वह 1987 में भाजपा में शामिल हुए और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह एबीवीपी के राज्य सचिव और राष्ट्रीय सचिव, भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और महासचिव रहे. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी एस येदियुरप्पा के साथ कुमार उन चंद पार्टी नेताओं में शामिल थे जिन्हें कर्नाटक में भाजपा के विस्तार का श्रेय दिया जा सकता है क्योंकि उन्होंने राज्य में संगठन को खड़ा किया और 2008 में पार्टी को राज्य की सत्ता तक पहुंचाया. दक्षिण भारत में तब भाजपा की पहली सरकार बनी थी. कुमार 1996 में पहली बार बेंगलुरु दक्षिण सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और निधन होने तक यह क्षेत्र उनका गढ़ रहा.

22 जुलाई, 1959 को बेंगलुरू में एचएन नारायण शास्‍त्री और गिरिजा शास्‍त्री के घर अनंत कुमार का जन्‍म हुआ. उन्होंने केएस आर्ट्स कॉलेज से बीए की पढ़ाई की थी. उसके बाद जेएसएस लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित होने के कारण, वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र विंग के सदस्य थे. इंदिरा गांधी सरकार में लगाए गए आपातकाल के दौरान हजारों छात्र कार्यकर्ताओं के साथ उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.

आपातकाल के बाद ही उन्हें एबीवीपी का राज्य सचिव बनाया गया था और साल 1985 में उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया. इसके बाद वो बीजेपी में शामिल हुए और उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया. साल 1996 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया.

11वीं लोकसभा में यानी 1996 में वो पहली बार बेंगलुरू दक्षिण से लोकसभा सांसद के रूप में चुने गए. ये पहले ऐसे भारतीय नेता थे, जिन्होंने अपनी निजी वेबसाइट लॉन्च की. जनवरी साल 1998 में उन्होंने www.dataindia.com और www.ananth.org. लेकर आए. 1998 में हुए चुनाव में उन्हें फिर से निर्वाचित किया गया और उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में केंद्रीय उड्डयन मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. वह उस सरकार में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री थे.

संसद के केंद्रीय हॉल में आधी रात को लाए गए ऐतिहासिक जीएसटी को उनके राजनीतिक करियर में अहम रूप से गिना जाएगा. सभी पार्टियों में आम सहमति बनाने की उनकी क्षमता, बिल संसद के दोनों सदनों में पारित कराने और 50 प्रतिशत से अधिक राज्यों को 3 हफ्तों के अंदर इसका समर्थन मिलने के बाद 1 जुलाई 2017 को इसे देश में लागू कर दिया गया.